गुरु है सरलता में गुरु है प्रखरता में
ज्ञान गंगा गुरु का ही पावन फुहार है
गुरु का ही ज्ञान इस जगत में छाया हुआ
गुरु से प्रकाशित ए जमीन आसमान है
गुरु के ही ज्ञान और उनके प्रयास से ही
आंतरिक शक्तियों का होता ये विकास है
ज्ञान से ही सबके अज्ञान को भागने वाले
गुरु में ही ज्ञान का अपार भंडार है
गुरु मंजिल रास्ता है गुरु पतवार हैं
गुरु रखते छोटे बड़े सब का ही ध्यान है
पालते हैं पोसते हैं ज्ञान की जलधार से
बच्चों का बगीचा खिलता गुरु के ही ज्ञान से
गुरु साक्षात प्रतिमूर्ति होते ज्ञान के
उन्हीं से ही विकसित ज्ञान विज्ञान है
गुरु में है भावना सभी के कल्याण की
इसीलिए गुरु का सर्वोच्च स्थान है
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


