पतझड़ सा आगन था मेरा
आज खुशी की छाया है
आज सुनहरे से जीवन मे
मौसम बसंत का आया है
खेतों में लहराए बाली
पुष्पों की कलियां खिली हुई
सूने सूने सपनों में भी
आज मधुरिमा भरी हुई
कल कल नदियों का प्रवाह
सबके मन को बेकल करती
आज खुशी के आने का
संदेश हृदय में है भरती
फूलों का हार मिले ना मिले
बाहों का हार सदा होगा
छुईमुई के पुष्पों में भी
अब मकरंद भरा होगा
पीली पीली सरसों फूली
हर ओर खुशी ही छाई है
नागफनी की क्यारी में भी
आज कली मुस्काई है
जंगल भी सबके मंगल का
गीत यहां पर गाए हैं
पा करके बसंती हवा को
आज बहुत इतराए हैं
आज ज्ञान की देवी का
अवतरण दिवस जो आया है
बुध भाव धीमान हुए सब
ऋतु बसंत का आया है
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


