माँ का दर्द

पार जाके सात सेतू रहनुमा जो बन गए

छोड़ अपनापन पराए गुलिस्ता के हो गए

याद में उनकी सदा ही मा तड़पती रह गई

लौट कर आए कहां वो जो वहां के हो गए

छोड़ कर के जो चले तो मां अकेली रह गई

लोरी किसको अब सुनाती आज चुप मां सो गई

घर ये उनका पालने का आज सूना हो गया

अब तलक छायी बहारें खिजा में बदल गई

उनका सपना था बसाएंगे कोई मंजिल नई

स्वप्न पूरा करने में ही अपनेपन से खो गए

योग्यता से आज अपने लक्ष्य ऊचां पा गए

भाव में ही डूबी मां के पलक को भीगा गए

भावना का ज्वार भाटा दिल में उठता रह गया

दिल से उठके लहरें उनकी आंख से बरस गया

भावना का तेल भरा बत्ती प्रेम बन गई

करुण भाव जो ऊंगा तो अग्नि दिल में जल गई

फूल बनके जो खिले थे जिंदगी के बाग में

मुरझूरा गई बहारे प्रेम जल अभाव मे

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रचनाकार

Author

  • गिरिराज पांडे

    गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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