बिछड़ने का दर्द

जब से मुझसे बिछड़ गए तुम याद बहुत ही आती है
दिल में उपजा भाव विरह की अग्नि हृदय को जलाती है
दर्द छुपा है दिल में जो ओ बाहर ना दिख पाता है
आंख से आंसू बहता हरदम मन विचलित हो जाता है
करुण वेदना छाती दिल में आह दिलों से उठती है
रोम रोम में कंपन होता कुश के जैसे चुभती है
कष्ट बताएं किसको अपना उसको दूर करेगा कौन
अपने दिल पर पत्थर रखकर हरदम रह जाता हूं मौन
आंखों का पानी सूखा पर घाव बना रह जाता है
दिल भावुक हो जाता जब जब घाव हरा हो जाता है
एक दिन का ये बिरह नहीं जीवन भर अब तो दूर हुए
सहा नहीं जाता है फिर भी सहने को मजबूर हुए

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रचनाकार

Author

  • गिरिराज पांडे

    गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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