बचपन और जवानी

जब कक्षा १२ पास भवा,

लगा कि बचपन बीत गवा।

कुछ करै के ख्वाइश हमरो रहिस,

हम डिग्री कॉलेज आय गवा।।

BA मा नाम लिखाय लेहे,

फिर सीना चौड़ा करे रहे।

पहले दिन ही इक कन्या से बात भइल,

देखतै देखत बवाल भवा….

दिन ब दिन हम लड़त रहे,

कबहूं कबहूं साथे हम पढत रहे।

लड़त रहे हां पढ़त रहे,

ना जाने कैसे बदनाम भवा…

हम अपने मस्ती मा रहत रहे,

BA के साथे उर्दू पढ़त रहे।

एक दिन बारिश खेल बिगाड़ दिहिस,

फिर अंजाने दरवाजे पै ठाड़ भवा

देख के वही लड़की का, दिमाग खराब भवा…

जइसन ठाड़ भवा दरवाजे

ऊं लड़की आय गइल।

भइल अजूबा कि ,

छोड़ लड़ाई ऊ बात करिस।

बाते बाते मा पहली बार नैना चार भवा….

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रचनाकार

Author

  • रंजीत गुप्ता "राही"

    रंजीत गुप्ता "राही" कवि, शायर,ज्ञानार्थी, शिक्षक। प्रतापगढ़,उत्तर प्रदेश। फोन-9170493847 Copyright@रंजीत गुप्ता "राही"/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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