घरनी मुझसे रूठकर (कुण्डलिया)

घरनी मुझसे रूठकर, चली गई ससुराल।

गया बुलाने एक दिन, आगे सुनिए हाल।

आगे सुनिए हाल, सामने साली आई।

अनुपम शिष्टाचार, साथ में लिए मिठाई।

घर पर शव सा रुप, वहॉं दिखती मन हिरनी।

प्रथम मिलन सी बात, शेष आई घर घरनी।।

जीजा जी ससुराल में, बहुत दिनों के बाद।

हंसकर साली ने कहा, भूले बिसरे याद।

भूले बिसरे याद, लक्ष्य सलहज ने साधा।

बीते दिन की कसक, मिटाऊंगी बिन बाधा।

सुधा सरिस रसधार, पूर्ण श्रद्धा से पी जा।

अमरशेष का प्रेम,जिओ तुम युग युग जीजा।।

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रचनाकार

Author

  • शेषमणि शर्मा 'शेष'

    पिता का नाम- श्री रामनाथ शर्मा, निवास- प्रयागराज, उत्तर प्रदेश। व्यवसाय- शिक्षक, बेसिक शिक्षा परिषद मीरजापुर उत्तर प्रदेश, लेखन विधा- हिन्दी कविता, गज़ल। लोकगीत गायन आकाशवाणी प्रयागराज उत्तर प्रदेश। Copyright@शेषमणि शर्मा 'शेष'/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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