ग्यारह दोहें

एक तमन्ना मर गई , होते होते शाम ।

तड़प तड़प कर आ गया , इस दिल को आराम ।

चटकी कली गुलाब की , हँसी ओंठ की कोर ।

फिर शरमाई द्वार पर , उजली उजली भोर ।

आज खिली आकाश में , सर्द श्यामला भोर ।

मेघों पर ना चल सका , आज सूर्य का ज़ोर ।

मन मेघों को चाहता , तन को भाए धूप ।

प्रियतम सा लगने लगा , आज भोर का रूप ।

झरने उतरे भोर के , जब आंगन के बीच ।

याद तुम्हारी भीगती , मन में आंखें मींच ।

जाने कितनी धड़कनें , जाने कितनी श्वांस ।

जाने कब इस रूह से , निकले तन की फांस ।

करुणा ममता प्रार्थना , सब नारी के नाम ।

जननी बहना प्रियतमा , को मेरा परनाम ।

बोझा ढोते पाप का , ये धरती औ नार ।

पुण्य सहेजे गर्भ में , रचे नया संसार ।

चुभी ह्रदय के बीच में , इक रेशमिया फांस ।

मन महके गुलदान सा , चंदन चंदन सांस ।

अभी हुआ मन बाबरा , अभी हुआ बेचैन ।

अभी हाल एहसास में , चुभे कटीले नैन ।

प्रीत जगी पीड़ा जगी , मन में उठी हिलोर ।

फिर छिटकी आकाश में , सजल बुंदीली भोर ।

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रचनाकार

Author

  • कमलेश श्रीवास्तव

    कमलेश श्रीवास्तव पिता-श्री शिवचरण श्रीवास्तव माता-श्रीमती गीता देवी श्रीवास्तव जन्म तिथि- 14 अगस्त 1960,श्री कृष्ण जन्माष्टमी जन्म स्थान- सिरोज, जिला विदिशा, म.प्र. शिक्षा-एम.एससी.(रसायन शास्त्र) साहित्यिक गतिविधियाँ- आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से रचनाओं का प्रसारण विभिन्न पत्र एवं पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हिन्दी उर्दू काव्य मंचों पर काव्य-पाठ| कृतियाँ/प्रकाशन- नवगीत संग्रह समांतर-3, गज़ल संग्रह "वक्त के सैलाब में" एवं गज़ल संग्रह "क्या मुश्किल है" का प्रकाशन सम्प्रति- शाखा प्रबंधक एम.पी. वेअर हाऊसिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स कार्पोरेशन शाखा पचौरी, जिला-रायगढ़ में शाखा प्रबंधक के रूप में पदस्थापित| संपर्क सूत्र- 269"धवल निधि" बालाजी नगर,पचौर, जिला- रायगढ़, म. प्र.,पचौर 465683 मो-09425084542 email-kamlesh14860@gmail.comCopyright@कमलेश श्रीवास्तव / इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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