देश दुनिया में कभी संक्रमण तो,
कभी आतंक का प्रहार हुआ।
कई आपदाएं सर उठाकर कुचलने को तैयार हुआ।
कभी चक्रवात(साइक्लोन), कभी भूकंप,
कभी भूस्खलन तो कभी कुछ और।
फिर भी लोग अपने अहंकार में,
अपने स्वार्थ को, पूरा करने को विभोर हुआ।
कर रहे अत्याचार, कर रहे व्यभिचार,
हर सिमा से नीचे जाकर, बताते खुद को महान।
वाकई ऐसे इंसान क्या हो सकते हैं महान?
रचनाकार
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जगन्नाथ पूरी, ओड़िशा, Copyright@पूनम गूँजा/इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


