इस कदर न मदहोश हो

इस कदर न मदहोश हो,

तुम्हे प्यास लग जाएगी

हर सांसे हो मदहोश

हवा प्यार की छटा लहराएगी।

ये प्यार का नाटक नही ,

ये प्यार एक नशा है ,

जो चढ़ गया सर पर

अगर तो जिंदगी वफा है ।

तू कुछ नही कर पाएगी ,

दिल में फितूर बढ़ जायेगी

इस कदर न मदहोश हो

तुम्हे प्यास लग जाएगी ।

हर सांसे हो मदहोश

हवा प्यार की छटा लहराएगी ।

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रचनाकार

Author

  • नवेंदु कुमार वर्मा

    जिला गया( बिहार) 824205. Copyright@नवेंदु कुमार वर्मा/इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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