अपनों से

निज अपनों से पिस रहे,हम तो अब हर रोज,

प्रेम यहां मिलता नहीं,लाखों कर लें खोज।

लाखों कर लें खोज, न कोई प्रेम निभाता

भाई -बन्धू,मात-पिता सब रिश्ता नाता।

कह बजरंगी लाल,हुई नफरत सपनों से,

लगा लिया मैं आस,सदा जो निज अपनों से।।

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  • बजरंगी लाल

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