अन्न कय सम्मान करव(अवधी कविता)

अन्न ज़िंदगी मनाई सब कय अन्न कय सम्मान करव ।
अन्न कईहां सुरक्षित राखव अन्न कय ना अपमान करव ।।
मेहनत औ पसीना बहाई कय अन्न उब्जावत हय किसान।
भुंखे पेट मनाईन का खाना खवावत हय किसान।।
मुंडन बिहाव होटल मा खाना वतनै लीहेव जतना खायेव।
खाना से हय ज़िंदगी मनाई कय कबहुं ना बहायो।।
किसान खेत जोती गोडी कय गोंहुं धान लगावत हय।
पानिस सींची कय भौंरी निकाय कय अन्न उबजावत हय।।
अन्न कय एक एक दाना पर लिखा कइयों कय मेहनत कय नाम।
अन्न उब्जावे कय खातिर सकारे से सांझा तक खेतेंम करत काम।।
माटी हवा पानी सुरज कय गर्मी कईयों कई अहसान हय।
पेट भरत जो सगरिव दुनियक किसान सबसे महान हय ।।
हर साल दुनियम लाखों मनाई पेट भर ना खाएस मरी जात हय।
कुछ पैदा करत कुछ खरीदत कुछ कुपोषित खाना खात हय।।
सांझ सकारे घर मईहां नाप तौली कय खाना बनावा करो।
बहाए ना जाय तनिको खाना पियार से खाना खावा करो।।
अन्न सरापत उई मनाईन का जो अन्न कय अपमान करय ।
उई भुंखे नंगे कबहुं नाई रहत जो अन्न कय सम्मान करय ।।
अन्न पेटम परी जो ना तो कुछ दिन मा तन से निकरी प्रान।
गोबर माटी चहला पानिम अन्न उब्जावे धरतीप किसान।।
माथेस लगाय अन्न का अपने डेहरी अउर बखार भरो।
पेट भरत ज़िंदगी देत तुम किसान से पियार करो।।

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रचनाकार

Author

  • आनन्द गिरि मायालु

    (कवि, लेखक, पत्रकार, समाजसेवी एवं रेडियो उद्घोषक) शिक्षा : स्नातक पेशा : नौकरी रुचि : लेखन, पत्रकारिता तथा समाजसेवा देश विदेश की दर्जनों पत्र पत्रिका में कविता, लेख तथा कहानी प्रकाशित। आकाशवाणी लखनऊ, नेपाल टेलीविजन तथा विभिन्न एफएम चैनल से अंतर्वाता तथा कविताए प्रसारित। भारत तथा नेपाल की तमाम साहित्यिक संस्थाओं से सम्मान तथा पुरुस्कार प्राप्त। पता : करमोहना, वार्ड नंबर 3, जानकी गांवपालिका, बांके (लुम्बिनी प्रदेश) नेपाल।Copyright@आनन्द गिरि मायालु/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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