पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

गज़ल

देखता रहा(गज़ल)

यूँ साजिशों की उठती नज़र देखता रहा कितना सहेगा मेरा जिगर देखता रहा जिनकी जफाओं से यहाँ कितने ही दिल दुखे उल्फत का ताज उनके

विस्तार से पढ़ें »

साहिब(गज़ल)

गुबारे दिल न जाने कब से है रोका हुआ साहिब तुम्हें पहचानने में है मुझे धोखा हुआ साहिब हुये थे जब मुहब्बत में ये इक

विस्तार से पढ़ें »
Total View
error: Content is protected !!