पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

मंजिलें

बना लो राह खुद अपनी, मंजिलें दिख हीं जाएगी । यदि दृढ़ हो इच्छाशक्ति, मुश्किलें मिट हीं जाएगी ।। भले हीं लाख ओले अड़े होंगे,

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कविता

चेतना संदेश

जाग जाग रे ज्ञानी मानव, ज्ञान का दीप जला लेना। चकाचौंध की इस आंधी में, मानवता को ना खा जाना।। सोच जरा क्या पाया है

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गज़ल

ख़्वाबों में आना छोड़ दो

तुम मेरे ख़्वाबों में आना छोड़ दो इश्क़ मेरा आज़माना छोड़ दो मैं बुलाऊं जब तुम्हें आया करो करना मुझसे अब बहाना छोड़ दो ‘मन्तशा’

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कविता

हिन्दुस्तान के घाती पर

ऐलान करो अब लाल किले से,चढ दुश्मन की छाती पर।नहीं चलेगा मुल्क हमारा, देशद्रोहियों की थाती पर।दुश्मन देश के हित में जिसकी उमड़ रही हो

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