
बाल दिवस
कुछ नन्हें दीपक सूरज को रस्ता दिखलाते हैं,कुछ जुगनू अपनी मेहनत से आलोकित हो जाते हैंकुछ हाथों की कलम कभी भी लिखती नहीं धरा पर,कुछ

कुछ नन्हें दीपक सूरज को रस्ता दिखलाते हैं,कुछ जुगनू अपनी मेहनत से आलोकित हो जाते हैंकुछ हाथों की कलम कभी भी लिखती नहीं धरा पर,कुछ

कैकई तुम उदास मत होना, तुमने अपना कर्तव्य निभाया था । विधि ने लिखा वनवास राम का, तुमने अपयश कहां कमाया था ।। राम यदि

रघुनंदन के साथ साथ में,सीता वन को जाती है, क्या वन में जाकर नाथ,कुछ याद न मेरी आती है । तुमको तुम्हारी उर्मिला,हर पल हर

जिंदगी से जल्द जो हार मान जाते है सुख की दहलीज़ से वो पीछे छूट जाते है। रेत में मिल जाती तब उनकी खुशियाँ उठ

वो एक कप कॉफी , कितना सुकून देती है ! रिश्तों में लाती है मिठास , दूर हुए लोगो को करती है पास , परिवार

ज्ञान जहाँ से मिले छोड़ना मत स्वयं को इस राह पर कभी रोकना मत यू चौंकते क्यों हो बात सही है किताब और दुनिया देती

निज अपनों से पिस रहे,हम तो अब हर रोज, प्रेम यहां मिलता नहीं,लाखों कर लें खोज। लाखों कर लें खोज, न कोई प्रेम निभाता भाई

इबादत रब की और सूरत यार की हो सजदा रब का और रस्म प्यार की हो आशिक़ों के मज़हब का क्या कहना ज़िक्र रब का

अमृत की है सबको लालसा, विष को भला पिएगा कौन ? प्रकाश की है सबको जरूरत, दिनकर सा मगर तपेगा कौन ।। अंधकार ने मारी