
रिश्ते वफ़ा ईमान और जज्बात देखिए
रिश्ते वफ़ा ईमान और जज्बात देखिए आदमी को आदमी की मात देखिए दूसरों की शाम पर फिर कह कहे सुने कितना गिरा है आदमी हालात

रिश्ते वफ़ा ईमान और जज्बात देखिए आदमी को आदमी की मात देखिए दूसरों की शाम पर फिर कह कहे सुने कितना गिरा है आदमी हालात

हर बाज़ी जीती थी मैंने दिल ने खाई मात कहाँ वाबस्ता हैं यादें जिनसे गुजरेगी वो रात कहाँ घर से बाहर हमने एकदम दुनिया अलग

हर दुआ में वो ज़माना चाहता हूँ फिर वही मिलना मिलाना चाहता हूँ मिल सके परछाइयाँ एहसास की रोशनी का वो ज़़माना चाहता हूँ देख

खेल तमाशा सा जीवन है मौसम इक सैलानी है पैकर है अपनी ख़्वाबों का जीवन अजब कहानी है मुझको व परवाह नहीं है किस्मत की

यादों की बारिश में धुलकर सुबह हुई है रेशम सी आँखों में एहसास घुले हैं याद घुली है शबनम सी यादों की इस नर्म धूप

तुम्हारी याद की आहट कोई किस्सा बताती है ये घुलकर साँस में मेरी नई दुनिया सजाती है तुम्हारी याद ही शायद है वो दीवार, सूनी

भावों की इस बेला में, तर्क कहांँ चल पाएगा ना कह कर पछताया है मन कह कर भी पछताएगा शब्दों की इस भीड़ भाड़ में

जो खो गई हैं चाहतें उनको तलाश दो मोहब्बत की राह में हूँ कोई खराश दो मासूमियत को ही मेरी संगशार कर दिया पत्थर सा

कुहरा घना छाया हुआ है ,पर्व यह आया हुआ हैठंडी हवा के झोंकों से, मन ये सकुचाया हुआ हैलग गई है भीड तट पर, जनसैलाब