पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

गज़ल

रिश्ते वफ़ा ईमान और जज्बात देखिए 

रिश्ते वफ़ा ईमान और जज्बात देखिए आदमी को आदमी की मात देखिए दूसरों की शाम पर फिर कह कहे सुने कितना गिरा है आदमी हालात

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गीत

हर दुआ मे वो ज़माना चाहता हूँ 

हर दुआ में वो ज़माना चाहता हूँ फिर वही मिलना मिलाना चाहता हूँ मिल सके परछाइयाँ एहसास की रोशनी का वो ज़़माना चाहता हूँ देख

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गीत

तुम्हारी याद

तुम्हारी याद की आहट कोई किस्सा बताती है ये घुलकर साँस में मेरी नई दुनिया सजाती है तुम्हारी याद ही शायद है वो दीवार, सूनी

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कविता

मकर संक्रांति

कुहरा घना छाया हुआ है ,पर्व यह आया हुआ हैठंडी हवा के झोंकों से, मन ये सकुचाया हुआ हैलग गई है भीड तट पर, जनसैलाब

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