
आखिर क्यों
रेगिस्तान की भूमि पर सोच रही थीं मैं दूर दूर तक कोई रहने वाला नही था वहाँ पर्यटक आते व लौट जाते आखिर.. क्यों..? क्या

रेगिस्तान की भूमि पर सोच रही थीं मैं दूर दूर तक कोई रहने वाला नही था वहाँ पर्यटक आते व लौट जाते आखिर.. क्यों..? क्या

देखो ना क्या से क्या हो गया दोनों का अलग रास्ता हो गया सादगी को छोड़ दिया लोगों ने आधुनिक यहां हर जवां हो गया

मुझे रात सँवर जाने को कहती है सुनो नींद आँखों में ठहर जाने को कहती है अजब सी बात थी जिसने मुझे महफूज रखा था

कभी जब आरजू दिल की मचल कर गुनगुनाती है वो कहते हैं कि तुमने फिर कई अश्आर कह डाले कभी पूछूं कि तुमको भी कोई

ये कभी ना कह सकूँगी ,तुमसे मेरी जा़त है तुम खुदा हो ,या वफा हो तुमसे हर जज़्बात है कह सकूँ ना फिर ये शायद,

कभी बेज़ार सी बातें कभी अनुसार की बातें कभी कुछ याद सी बहती कभी बेकार सी बातें कभी एहसास लफ़्जों में कभी कुछ गीत शब्दों

समय ने खोले बंद पुराने अनुभूति का गहरा सागर तृष्णा चुगता एक पपीहा सुधि से शीतल कई जमाने समय ने खोले बंद पुराने प्रथम

तू मिला कि मुझको जहाँ मिला हर दर्द मुझको धुआँ मिला वो जो इश्क़ का भी गुमाँ मिला मुझे बंदगी का जहाँ मिला तू ही

न ही हिज्र है ना बिसाल है ना उदासियों का उबाल है न ही जुस्तजू न ही आरज़ू, हर वक्त तेरा ख़्याल है तेरी याद

चाँद की बातें चाँद के किस्से चाँद के सब अफ़साने हैं बीती बातें बीती रातें गुज़रे कई ज़माने हैं इक अल्हड़ ने उन बातों में