
लिखा जो एक साथ नाम रेत पर
लिखा जो एक साथ नाम रेत पर।किसी लहर ने आन मिटाया होगा।।तेरी गहरी सी इन आंखों में कोई गैर खूब नहाया होगाबता मेरे बिन इनमें

लिखा जो एक साथ नाम रेत पर।किसी लहर ने आन मिटाया होगा।।तेरी गहरी सी इन आंखों में कोई गैर खूब नहाया होगाबता मेरे बिन इनमें

जिन्हें अपना समझ रखा था सारे गैर निकलेजो दबा के रखा था दिल में सुकून की तरहवह सारे ख्वाब जहर निकलेहमें वफा मिली गांव की

आंखों की भी अब अपनी मर्जी होने लगी है ।बात खुशी की हो या गम की हर बात पर रोने लगी है ।।सूरज ढला चांद

पूजित सदा जगत में नारीसृष्टि सृजन की प्रथमा अधिकारीचंद्रयान आकाश उड़ातीअपने साहस का परचम लहरातीशोभा इनकी सबसे न्यारीसृष्टि सृजन की प्रथमा अधिकारीइनका ना था इतिहास

मैंने तनदाता से यह तन तो है पा लिया, संचालित करने को नवश्वास मुझे दीजिये॥ धन की चमक में ना चमकना मैं चाहता , ज्ञान

एक बार धर कर अधरन पर, मुरली सुधा लुटा दो। जीवन-भर की व्याकुल्ता को पल में आज मिटा दो। जीवन नैय्या मेरे कान्हैय्या मझधारों में

खिदमत-ए- हिंद में, जो गुज़र जायेंगे, नाम अपना शहीदों में कर जायेंगे। हमने प्यार भी तुमसे किया है मगर, याद रखना तुम्हें भी हम छल

इज़्ज़त का सर जब कटता हो जब धीरे- धीरे छँटता हो जब लहू से लोहित हो धरती हो जब पापों से इज़्ज़त पलती हो तभी

गुजर बसर से उप्पर उठी कय चलो कोई सिखा जाय।हाथेस अपने चलो आज अपन मुकद्दर लिखा जाय।।बुद्धि संघेंन विवेक मिला उप्पर से स्वस्थ्य देंही दिहीन

प्रियतम मोरे आन मिलो, इस दिल को कुछ तो चैन मिले। दरस तुम्हारे मैं पा जाऊँ कोई तो ऐसी रैन मिले। छलिया बनकर के जीवन