
आज से बस मेरी हो
वजह रही हो चाहे जो भी मुझसे मिलने कीस्वार्थ में या की प्रेम में ही बात करने कीआंख के रास्ते से दिल में समाए बैठी

वजह रही हो चाहे जो भी मुझसे मिलने कीस्वार्थ में या की प्रेम में ही बात करने कीआंख के रास्ते से दिल में समाए बैठी

जिंदगी के सफर में यूं ही घूमता हूंहवाओं के संग में ही मैं झूमता हूंवादियां जो प्रकृति की प्रफुल्लित खिली हैंउसी में ही जीवन का

पतझड़ सा आगन था मेराआज खुशी की छाया हैआज सुनहरे से जीवन मेमौसम बसंत का आया हैखेतों में लहराए बालीपुष्पों की कलियां खिली हुईसूने सूने

कभी उठती थी ओ पलके,कभी ओ झुक भी जाती थीकरूं मैं याद जब उनको,मुझे तड़पा भी जाती थी कभी सोचू जो ओ बातेंदिलो मे आह

दिलाई जिसने आजादी नमन उनको मैं करता हूंगवाएं प्राण थे जिसने नमन उनको मैं करता हूंनहीं देखा नहीं सोचा कि आगे हाल क्या होगासमर में

फासला ना हो कभी भी दिल से दिल के मेल काएहसास का हो फासला ना हो कभी उम्मीद काहम संभलते ही रहेंगे जिंदगी के मोड़

सुनोमेरे साथी मेरे हमगममै तुम्हे याद बहुत करती हूंतुम वहां दुश्मनों से लडते हैमै यहां तुम्हारी यादो से लडती हूंकुछ तो बताओ कब तक आओगेमेरे

कितना कुछ सिखाती हैं ज़िंदगी,कभी गिराती तो कभी उठाती है ज़िंदगी।संघर्षों से लड़ना सिखाती है ज़िंदगी, आम से खास बनाती है ज़िंदगी।कभी आशा कभी निराशा

तुम कला, स्वर की देवी हो माँ,तुम बिन यह जीव गूंगा है माँतुम बिन यह संसार,अज्ञानता से भरा है माँतुम ज्ञान की देवी हो,ज्ञान प्रदान

चलो 26 जनवरी,की करते है तैयारीसीमा पर,निगरानी करते हैकोई दुश्मन मौका,देखकर घुस ना आयेहमारी सीमा मेंऔर मचा दे ना आंतकजब मना रहे हो,देशवासी गणतंत्र दिवसचौकसी