
स्पर्धा
निरंतर आगे बढती चल तू मंजुकभी निराश न होना बस चलती जानान हताश होना बस बढ़ती जानाआगे आगे चलना होगानही पीछे मुड़कर कभी देखना होगातू

निरंतर आगे बढती चल तू मंजुकभी निराश न होना बस चलती जानान हताश होना बस बढ़ती जानाआगे आगे चलना होगानही पीछे मुड़कर कभी देखना होगातू

प्रकाश का मार्ग, अतिसुंदरदेखने मे मनमोहित होता हैंपर न जाने क्यो मुझे रीतापन सा लगता हैंचारो और रंगीन लाइटो की चकाचोंध तो है बेशकपर क्या

निष्कर्म भाव से ही,प्रकृति देती हमको सबक्यो फिर पीछे हैं मानव उसके पोषण में अब।धरा के रूप को नमी को सवारना होगा अबअब चेत जा

इस दुनिया में न जाने कितने, रिश्तों की यहाॅ॑ भरमार हुई। दिल का रिश्ता सबसे प्यारा, दुनिया खुशियों से गुलजार हुई। कुछ बन जाते अनाम

वन के दुःख दर्द अमंगल, सबसे प्रीत निभाऊंँ रे। मैं कविता का औघड़ साधू, धूनी अलख जगाऊँ रे।। जिनकी खुशियों को सपनों के चन्द लुटेरे

वक्त ने बनाया मुझे वक्त से दीदार करूं वक्त के है हक में मुझे चाहे की इंकार करे समय का फैसला जिसका श्रृंगार करू जो

मौसम का फिजा यू बदलने लगा ना तुम होश में थे ना मैं होश में लगा देखा जिस ने उसी ने कहा ये कौन सा

टुकड़ों में बटां था, रखवाला गद्दार था ,कोई घरवाला जान ना सका इरादा उसका दुश्मन को धूल चटाने वाला बांट दिया था ,टुकड़ों में गद्दारों

फूल तुम्हें भेजा है….I have sent you an email,Not an email, is my heart,O my love write to me,Is it worth for you or not

है नारी जग की क्यारी जीवन उसकी न्यारी न्यारी रखती सबका ख्याल है जीवन सवारी सवारी दायित्व परिवार का वंश और घरवार का रिश्ते में