
बोल रहा इतिहास
चीखकर बोल रहा इतिहास तुम्हारे हाथों में भगवाधारी है भगवा की अब लाज तुम्हारे हाथों में बीत गया जो समय-समय से बुरी रात का सपना

चीखकर बोल रहा इतिहास तुम्हारे हाथों में भगवाधारी है भगवा की अब लाज तुम्हारे हाथों में बीत गया जो समय-समय से बुरी रात का सपना

चार पैसे की जिंदगी ,लाखों कमाने लगे हम अपने घरों से दूर जाने लगे मां-बाप ना घर द्वार मिले ,पैसे की रस्म निभाने लगे बीवी

गीत तू मैं गुनगुनाऊ एहसास दिल की सुनाऊं है जहां में गम सभी को आ तुझको मैं दिखलाऊ गम है तुझको किस बात का हाथ

मिलता होगा छप्पन भोग खाने को मधुर वहांमाखन चुराने यहा क्यू अब आएगेसोने का मुकुट होगा अब तो उनके सिर परमोर का मुकुट सिर पे

आओ रंग जाए एक ही रंग मेंप्रेम –प्रिया के संग मेंआओ स्वर्ग सा खिल जाएं हमफागुन की खुशी उमंग में । आज न हो शिकायत

खूब घुट रही प्रिय के प्रेम की लाली भंग रंग।कान्हा होली खेलन आ रहे प्रिया संग रंग ।स्पंदित मन छलक रहा आगमन से तुम्हारे,परमात्म मिलन

होली रंग भरी जो आई सबके दिल में प्यार जगाईशिकवा गिला को दूर भगा कर सबको गले मिलाने आईदेखो फिर से होली आईप्रेम रंग में

रंग के संग भंग और हाथ में गुलाल होझूम रही सबके मन में फागुनी बयार होखेलते गुलाल सब ही गाते एक राग होटोलियों के पीछे

आज अपने गले से लगा लो मुझेदेखिए रुत तो अब फागुनी आ गईमेघ की आज बारिश भले कम हुईरंग मे घुलती बारिश तो फिर आ

देखो रुत आज होली की फिर आ गईरंग भरकर दिलों में तो फिर छा गईशुक्ल के पक्ष की पूर्णिमा रात हैआज पूरे गगन पर खिला