पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

खुशी –खुशी से मेरी जिंदगी

खुशी –खुशी से मेरीजिंदगी गुजार देनादुख आए तो हे ईश्वर !मुझे निकाल देना । ये जिंदगी गम का मारा हैलूट गया सारा हैअब तू ही

विस्तार से पढ़ें »
कविता

चल मनोरमे एक उम्र पूरा हुआ

चल मनोरमे एक उम्र पूरा हुआ।। अब दूसरे की दुआ राम से माँगने चले।अपने मित्रों के साथ चैतावर गाने चले।अपने- अपने बिटिया रानी,के नयनो में,राधा

विस्तार से पढ़ें »
कविता

आधुनिक नारी

रूढ़िवादिता को खंडित करतीआज की आधुनिक नारी हूँ मैं,मान मर्यादा की इज्जत रखतीसुदृढ़ और संस्कारी हूँ मैं.! त्याग,समर्पण,सहनशीलता सेमिटा देती मैं ख्वाईशें अपनी,दूसरों की खुशियों

विस्तार से पढ़ें »
कविता

नारी

है नारी जग की क्यारीजीवन उसकी न्यारी न्यारीरखती सबका ख्याल हैजीवन सवारी सवारी दायित्व परिवार कावंश और घरवार कारिश्ते में लाती मिठास हैयह दस्तूर है

विस्तार से पढ़ें »
कविता

स्त्री

अपने सपनों में सेअपनों के सपनों को बीन-बीन कर निकालती है।स्त्री कुछ ऐसी ही रची गयीजिन पे छत टिकी, उन दीवारों को संभालती है। कहाँ

विस्तार से पढ़ें »
कविता

खुशी –खुशी से मेरी जिंदगी

खुशी –खुशी से मेरीजिंदगी गुजार देनादुख आए तो हे ईश्वर !मुझे निकाल देना । ये जिंदगी गम का मारा हैलूट गया सारा हैअब तू ही

विस्तार से पढ़ें »
पद्य-रचनाएँ

पत्नी

पत्नी रहती है इंतजार में अब वो भी प्यार में कहती है खटूस हर वक्त इजहार में मां के बाद पत्नी व्यवहार में हर जगह

विस्तार से पढ़ें »
Total View
error: Content is protected !!