पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

पद्य-रचनाएँ

शायरी

क्यों शर्मिंदा करते हो रोज़ हाल पूंछ कर,हाल वही है जो तुमने मेरा बना रखा है।। लिखना चाहता हूँ मैं भी कुछ गहरा सा, जिसे

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कविता

जिंदगी एक जैसी गुजरी हो

मैंने हंसकर के गुजारी है जिंदगी अपनीभले ही जिंदगी कांटों से होके गुजरी होसदा ही ठोकरो से सीखा संभलना मैंनेभले ही जिंदगी मे ठोकरे ही

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कविता

तुम सदा ही जियो इस वतन के लिए

देश के नौजवानों भुलाना नहींदेश की अस्मिता को मिटाना नहीतुम भले प्राण दे दो वतन के लिएदाग अपने वतन पर लगाना नही नाम तेरे वतन

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कविता

सपने सजा जाता है

दर्द होता है और दिल ये मचल जाता हैजब भी दिल को मेरे तेरा ख्याल आता हैउलझने छाती मन में आंख ये तारे गिनतेजबसे आंखों

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कविता

मिल गई जिसको जमी

मिल गई जिसको जमी आसमान पहुंचेगा फूल कैसा भी हो हर हाल में ओ महकेगामिल गया जिसको सितारा हमेशा चमकेगादिल की गहराइयों में डूब कर

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कविता

एक महिला से हर रिश्ता

एक महिला जिससेहर रिश्ता बुनियादी हैजो बचपन की गुरु हैऔर ममता की फरियादि हैमहिलाओं का सम्मानफ़र्ज है हमारायही सबक सबकेलिए मर्यादी हैदिलों पर पहलाअधिकार माँ

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