
स्त्री
जब तक स्त्री सुनती है, चुप रहती है,घर के सारे काम करती है,हाँ में हाँ मिलाती है, बिना सही गलत समझे,तब तक हि लोग उसे

जब तक स्त्री सुनती है, चुप रहती है,घर के सारे काम करती है,हाँ में हाँ मिलाती है, बिना सही गलत समझे,तब तक हि लोग उसे

आत्महत्या कोई किस हालातों में करता है,कोई उस इंसान के दर्द को उतनी गहराई से,शायद हि समझ सकता। कोई एक कारण नहीं होता, नहीं हो

अक्सर ये होता है,लिखने वाला लिखता अपने दिल कि है,चाहे उसके अनुभव हो, या उसने कहीं देखा हो,चाहे उसके मन कि पीड़ा हो, ख़ुशी हो,या

देश दुनिया में कभी संक्रमण तो,कभी आतंक का प्रहार हुआ।कई आपदाएं सर उठाकर कुचलने को तैयार हुआ।कभी चक्रवात(साइक्लोन), कभी भूकंप,कभी भूस्खलन तो कभी कुछ और।फिर

मैं मेरी तन्हाइयाँ थीं और थीं ख़ामोशियाँ सिर्फ़ इतना ही बचा था तेरे मेरे दरमियाँ गर तुझे मालूम होतीं इश्क़ की गहराइयाँ तो समझता क्यूँ

सब गरीब धनवान हैं , सब धनवान गरीब । उल्टी पुलटी चीज़ सब , दुनिया बड़ी अजीब । उनकी हालत हो रही , अंतिम समय

घरनी मुझसे रूठकर, चली गई ससुराल। गया बुलाने एक दिन, आगे सुनिए हाल। आगे सुनिए हाल, सामने साली आई। अनुपम शिष्टाचार, साथ में लिए मिठाई।

यूंँ ज़िंदगी में गलतियांँ दोहराई नहीं जाती, यूंँ बात सभी की दिल से लगाई नहीं जाती। परिंदे हैं, उड़ने दो इन्हें उन्मुक्त गगन में ,

सड़ चुके किचड़ में हीकमल के फूल निकलती है,ये खुशी का इजहार न कर,ये खुशियाँ तकलीफ से निकलती है। वो दिखते बहुत खुशहाल हैपर अंदर

दिलों में जिनके हूं अब तक दिलों में उनको रखूंगान निकलूंगा कभी दिल से निकलने उनको ना दूंगाचुराया दिल मेरा जिसने उसी का दिल चुराऊगासदा