पद्य-रचनाएँ

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दोहा

शिवरात्रि

जगजननी माँ पार्वती, शिव देखें अनिमेष। पावन परिणय हो गया, अद्भुत और विशेष।। भूत-प्रेत मिल साथ में, चले सभी बारात। मनभावन लगने लगी, त्रयोदशी की

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गीत

शिव बम बम

प्रगटे शंकर अविनाशी फिर झूम उठी है काशी बोले जय जय कैलाशी साँसों की सरगम हर हर शिव बम बम, हर हर शिव बम बम

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कविता

नारी

युग युगों से हूँ बनी पहचान जग में प्रेम की, क्या हुआ यदि मैं नहीं कान्हा की परिणीता हुई। राम जिसके बिन कभी भी राम

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कविता

बसंती बयार होली लायी

बसंती बयार होली लायी,हर ओर उड़ रहे रंग-गुलाल,मस्तानों की टोली आयी,अमराई में लगी मंजरी,मदिर मंद मुस्कायी,लगे नव पल्लव बगिया बगान में,सुंदर कलिया मुस्कायी,रंग गुलाल के

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कविता

बेवड़ो की होली (हास्य रचना)

आ ही गयी हर दिल अज़ीज़ होली,अब हो जाएगी सबकी मीठी बोली,बच्चों का तो ये पसंदीदा त्यौहार है,बूढ़ों के लिए ये जवानी उपहार है,हर जगह

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कविता

झूठे नैन

तुम्हारे झूठे नैन अनुत्तरित प्रश्न प्रश्ननीय हल तेरी खुशबू इंद्रजाल सा जादू मन बेकाबू उलझे रिश्ते बेजोड़ विभाजन न घटा न गुणा ख्याली पुलाव जलता

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