पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

मान बेच कर सुविधा पाना-तौबा-तौबा

मान बेच कर सुविधा पाना-तौबा-तौबा साहब के तलवे सहलाना- तौबा-तौबा ! मिहनत-मजदूरी का रूखा-सूखा अमृत हया गँवा कर हलवा खाना-तौबा-तौबा! गली-गली में, गाँव-शहर में,डगर-डगर में

विस्तार से पढ़ें »

मछली-पोखर

फेंकते हैं वे मुट्ठीभर मूढ़ी धक्का-मुक्की करतीं देह पर देह लदीं उपलाती हैं-मछलियाँ प्रसन्न होते हैं पोखरपति उनकी अहेरी आँखों में प्रतिबिम्बित हो उठता है

विस्तार से पढ़ें »

हम छले गये

ज़िन्दगी तो त्रासदी हुई उन्हें मधुर गीत चाहिए! आँखों पर पट्टियाँ पड़ीं कोल्हू के बैल बने हम वंचना के वृत्त में फँसे खींच रहे बोझ

विस्तार से पढ़ें »

झूमती फूलों भरी डाली लिखें

झूमती फूलों भरी डाली लिखें हर शजर के लिए हरियाली लिखें । सूर्य-किरणों के लिए सादर नमन अमरबेलों के लिए गाली लिखें । रू-ब-रू है

विस्तार से पढ़ें »

भूख

भूख झेलना भूख पर भाषण बेलना दो विपरीत बातें हैं बरखुरदार ! चाहे जितनी बार ‘ आग ‘ कहिए जीभ को आँच तक नहीं आती

विस्तार से पढ़ें »

इस सफ़र में

ज़िन्दगी के इस सफ़र में धूप भी है- छाँह भी । कंटकों की सेज सोना ख़्वाब फूलों के संजोना मुस्कुराना आँसुओं में हर्ष में पलकें

विस्तार से पढ़ें »

ओ प्रिये !

अहं जब होकर तरल है ढुलक जाता अश्रु बनकर याद आती है तुम्हारी ओ प्रिये! जब कभी लगता है घिरने दिन में ही आँखों के

विस्तार से पढ़ें »

दर्द की परछाइयाँ

दर्द की परछाइयाँ भीड़ में है आदमी पर ढो रहा तनहाइयाँ घेरती हैं ज़िन्दगी को दर्द की परछाइयाँ ! वायदे ,नारे सुनहरे कब निभाएँगे जनाब

विस्तार से पढ़ें »
Total View
error: Content is protected !!