
पुलवामा
टुकड़ों में बटां था, रखवाला गद्दार था ,कोई घरवाला जान ना सका इरादा उसका दुश्मन को धूल चटाने वाला बांट दिया था ,टुकड़ों में गद्दारों

टुकड़ों में बटां था, रखवाला गद्दार था ,कोई घरवाला जान ना सका इरादा उसका दुश्मन को धूल चटाने वाला बांट दिया था ,टुकड़ों में गद्दारों

फूल तुम्हें भेजा है….I have sent you an email,Not an email, is my heart,O my love write to me,Is it worth for you or not

है नारी जग की क्यारी जीवन उसकी न्यारी न्यारी रखती सबका ख्याल है जीवन सवारी सवारी दायित्व परिवार का वंश और घरवार का रिश्ते में

प्रतीक्षारत थक जाती हैं आँखे पर नही थकती प्रतीक्षा अवचेतन में पड़ी यादें नही रहने देती चैन से मन भी रहता हैं विचलित टटोलती हैं

दुलहिन अस धरती सजी भवा सीत कै अंत लयि पुरुवाई आयि गै बगियम् नवा बसंत बगियम् नवा बसंत लिखैं प्रिये प्रियेतम का पाती अउ महुआ

आइस पाइस गुल्ली डंडा गिट्टक अउर कब्बड्डी बाजी जीतै बदे लगी खुब बेरि बेरि हरबद्दी कहां दिन चला गवा ! बगिया बगियम् चलत रही दुपहरियम्

होली हय भाई होली हय बुरा ना मानव होली हय।फागुन महिनम उड़त हय धुरी मिठ सब कय बोली हय।।गोंहू अउर महुवा पाक चुनर सब कय

पैसा सोना चांदी टीवी फ्रिज ना हमका कार चाही।मिलय मेहरूवा सीधी साधी सुन्दर व्यवहार चाही।।मानय हमका लरिका जस अस हमका ससुरार चाही।सालिक मानी बहीनी जस

मुरझान डेरान मुंह बनाए एक दिन फुल कहय माली से।का बिगारेंन तुम्हार हम जवानिम तुरत हमका डाली से।।काटत छाटत सबसे बचाए खाद अउर डारत पानी।बिरवस

अन्न ज़िंदगी मनाई सब कय अन्न कय सम्मान करव ।अन्न कईहां सुरक्षित राखव अन्न कय ना अपमान करव ।।मेहनत औ पसीना बहाई कय अन्न उब्जावत