कविता

Category: कविता

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फागुनी फुहार हो

रंग के संग भंग और हाथ में गुलाल होझूम रही सबके मन में फागुनी बयार होखेलते गुलाल सब ही गाते एक राग होटोलियों के पीछे

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पर्व है रंगों का

पर्व है रंगों का मन को भी रंग लीजियेहोलिका भस्म हुई प्रहलाद को संग लीजिएभक्ति की शक्ति को सदा नमन रंग दीजिएनास्तिकता बदरंग है इसका

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लेखक और उसकी लेखनी

लेखक और उसकी लेखनीस्वतंत्र हो आजाद हो तो है घनी मुग़ल आये तो हिन्दुओं ने कमियां ज्यादा देखि या खूlबीयांसोचती तो होंगीलेखक और उसकी लेखनी

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फागुन में मन बौराया

फागुन में मन बौरायामनवा बहुत ललचायावातावरण बना सुखमय सौंदर्य काखुशबू फूलों को भाया । फागुन के रंग में हम भी ढलेंराधा कृष्ण के संग चलेंखूब

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