रंग भऐं सब प्रीत

कौन रंग फागुन रंगे,

रंगे भऐं सब प्रीत,

बसंत  रंग सब रंग रखा,

धरा हुई सब प्रीत ।

नीला अंबर रंग दिया,

धरा हुई रंगीन ,

नर नारी सब हुए बाबरे,

खेले रंग अधीर ।

 महुआ लगे हैं झूमने ,

टेसू खिले हैं फूल,

सज धज बैठी राधिका,

कृष्ण रंग लगाए खूब ।

राग बैरागी त्याग कर,

मन मुटाव दिया भूल,

मन में रंग भर प्यार का,

होली खेले खूब ।

द्वेष भाव सब दूर हो,

प्रेम रंग रंगीन,

मिलजुल कर सब रंग दिए, हो गए सब प्रणय रंगीन ।

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रचनाकार

Author

  • राकेश कुमार कुशवाह

    सहायक अध्यापक, विद्यालय :- पूर्व मा. विद्यालय बछैपुरा, जलेसर, जनपद-एटा, पत्राचार का पता-E 4/429 शहीद नगर, शमसाबाद रोड राजपुर चुंगी साई बाबा मंदिर के पास, 282001, प्रकाशित कृतियां : 1.एक कदम और,2. गतिविधि आधारित शिक्षण,3. खेल खेल में बने निपुण, 4. क्रियात्मक शोध,5. बारिशों की रिमझिम,6. भावों का इंद्रधनुष,7. अवध के राम,8. अधरो में ठहरे, अनसुने अल्फाज,9. खामोशियों का शोर,10. झूठी मुस्कराहट,11. तन्हाइयों से दोस्ती,12. भावों का इंद्रधनुष,13. मानव या दानव,14. Before rain. प्राप्त सम्मान:- 1. इंटरनेशनल एजुकेशन अवार्ड 2023,(गलगोटिया यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश), 2.शिक्षक श्री सम्मान, ( राज्यपाल केरल द्वारा) 2024, 3. एडुलीडर्स सम्मान 2021, 4. प्रदेश गौरव सम्मान 2023, 5.शिक्षा रत्न सम्मान 2022, 6.शब्द शिल्पी सम्मान2024, 7.साहित्य सेवा सम्मान 2024, 8.राष्ट्रीय बालिका शिक्षा पुरस्कार 2024, (सूर्य क्रांति फाऊंडेशन नोएडा उत्तर प्रदेश), 9. प्रदेश नवाचारी शिक्षक सम्मान 2023, (शैक्षिक नवाचार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश), 10. जिला स्तरीय आईसीटी अवार्ड( डायट एटा), 11.ज्ञान रत्न सम्मान 2024 , ( नव प्रज्ञा काव्य फाउंडेशन उत्तर प्रदेश)./ © राकेश कुमार कुशवाह

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