मदन गोपाल सबके हैं

सब जन उसके अपने हैं,वो मदन गोपाल सबके हैं,

एक हाथ में मुरली अपने,दूजे में सुदर्शन रखते हैं ।।

माखन को कभी चुराते हैं,गिरवर को कभी उठाते हैं,

सूर रहीम मीरा जिसके, भोर शाम गुण सदा गाते हैं ।।

जो द्रोपदी का चीर बढ़ाते हैं,नरसी का भात चढ़ाते हैं,

ऐसे दीनदयाल कृष्ण को,हम सादर शीश झुकाते हैं।।

कभी गीता ज्ञान सुनाते हैं,युद्ध का शंख बजाते हैं,

अधर्म बढ़ जाता हैं धरा पर,तब गोविंद स्वमं ही आते हैं।।

भक्तों की लाज बचाते हैं,नटखट लीला दिखाते हैं,

गोकुल बृंदावन बरसाना,मोहन की याद दिलाते हैं ।

यमुना तट सूना सूना सा,प्रभु लीला नहीं रचाते हैं,

गैय्या तुमको सदा बुलाती,मोहन क्यूं नहीं आते हैं ।।

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रचनाकार

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  • अनूप अंबर

    नाम : अनूप अंबर जन्म तिथि:01जनवरी 1991 पिता का नाम:राजेश कुमार पता: फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेशइनके नौ साझा संकलन प्रकाशित हो चुके हैं, पच्चीस अर्थलोगी प्रकाशित हो चुकी है, विभिन्न मंचों से 150 से अधिक सम्मान पत्र प्राप्त है, इनकी विभिन्न रचनाएं पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है,ये कई साहित्य पटलों पर सक्रिय है ।। Copyright@अनूप अंबर / इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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