चिराग आंधियों में अब जलाएगा कौन

चिराग आंधियों में अब जलाएगा कौन?,

गिरते हुए लोगों को अब उठाएगा कौन?,

सब लोग अपनी अपनी राह चल दिए,

भटके हुए लोगों को राह दिखायेगा कौन?।।

हम भी अगर चलने लगे भेड़ों की चाल तो,

मजबूर की आवाज, फिर उठाएगा कौन? ।

करने लगे जो हम भी,सियासत की जयकार।

तो हकीकत से रूबरू,फिर कराएगा कौन?।।

दिनकर और दुष्यंत को,जब पढ़ा तो जाना,

अपनी कलम से वफाएं,निभायेगा भला कौन ?

हर तरफ सियासत ही,सियासत चल रही है,

गरीब के घर में रोशनी,पहुंचाएगा भला कौन ?

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रचनाकार

Author

  • अनूप अंबर

    नाम : अनूप अंबर जन्म तिथि:01जनवरी 1991 पिता का नाम:राजेश कुमार पता: फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेशइनके नौ साझा संकलन प्रकाशित हो चुके हैं, पच्चीस अर्थलोगी प्रकाशित हो चुकी है, विभिन्न मंचों से 150 से अधिक सम्मान पत्र प्राप्त है, इनकी विभिन्न रचनाएं पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है,ये कई साहित्य पटलों पर सक्रिय है ।। Copyright@अनूप अंबर / इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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