# ज्ञानविविधा > ज्ञानविविधा - विविध विषयक ज्ञान का इन्टरनेट पर एकीकृत मंच ## Posts - [कुछ नाम हुए](https://gyanvividha.com/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f/): कुछ नाम हुए कुछ बदनाम हुए आके तेरे पहलू में ये काम हुए आओ अलविदा कह दूं घर जाने को है और शाम हुए सीखा बहुत कुछ, कुछ सिखाया भी है दर्द ए जिंदगी गाया भी है कुछ लोग दिल के मुहाने पर आए कुछ लोग दिल को भरमाया भी है बना किरकिरी किसी के लिए किसी की आंखों में समाया भी है है संतोष मुझे उल्फत ने आजमाया भी है चलता हूं अब ,चलना भी है गम ए जुदाई गाना भी हैं रहेंगे कौन कहां जिंदगी को आजमाना भी हैं शिकवा शिकायत चलता रहेगा जिंदगी के पन्ने बदलता रहेगा […] - [विदाई](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%88/): खट्टी मीठी यादों को सहेज आज विदाई की बेला आई है हैं हर्ष भी, विषाद भी ! जाने क्यों आंख भर आई है है लोग प्रतिक्षा में कुछ विदाई को आए है कैसे कह दूं अलविदा दिलो में जो घर बनाए है हां,थी शिकायत मुझे भी,उसे भी आज भुनाने आए है रहेगा याद दोनो को आंख के आंसू बताने आए है बनेगा गवाह हमदोनो के मिलन का हिलते हाथ बताने आए है -डाॅ. शंकर सुमन - [बस नजरिए का फर्क है।](https://gyanvividha.com/%e0%a4%ac%e0%a4%b8-%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ab%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a5%a4/): जीवन की अधिकांश उलझनें, विवाद, दुख और खुशी का मूल कारण एक ही है – नजरिया। यानी जिस चश्मे से हम दुनिया, घटनाओं, लोगों और खुद को देखते हैं। एक ही सूरज उगता है, एक ही बारिश होती है, एक ही असफलता आती है, फिर भी कोई रोता है, कोई मुस्कुराता है। फर्क सिर्फ नजरिए का होता है। सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है आधा भरा गिलास। एक व्यक्ति कहता है – “गिलास आधा खाली है”, दूसरा कहता है – “गिलास आधा भरा है”। दोनों सही हैं, पर दृष्टिकोण अलग है। पहला कमी पर फोकस करता है, दूसरा उपलब्धि पर। इसी छोटे-से […] - [अश्लीलता और सोशल मीडिया](https://gyanvividha.com/%e0%a4%85%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/): आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने संचार, मनोरंजन और जानकारी के आदान-प्रदान के तरीके में क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं। इस विशाल प्लेटफॉर्म ने लोगों के बीच जुड़ाव को बढ़ावा दिया है, लेकिन साथ ही इसमें कई नकारात्मक पहलू भी सामने आए हैं। उनमें से एक प्रमुख मुद्दा है अश्लीलता का प्रसार, जो समाज के नैतिक और सामाजिक मूल्यों पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। सोशल मीडिया पर अश्लीलता की समस्या विभिन्न रूपों में प्रकट हो रही है। इसमें अश्लील वीडियो, तस्वीरें, आपत्तिजनक भाषा और गलत संदेश शामिल हैं, जो खासकर युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इन सामग्रियों […] - [तलाश अपने अस्तित्त्व की](https://gyanvividha.com/%e0%a4%a4%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b6-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%80/): मनुष्य के जीवन की सबसे गहरी और मौलिक जिज्ञासा होती है—”मैं कौन हूँ?” यह प्रश्न जितना सरल प्रतीत होता है, इसका उत्तर उतना ही जटिल और गूढ़ है। जब कोई मनुष्य अपने चारों ओर की भीड़, संबंधों, सामाजिक भूमिकाओं और दैनिक गतिविधियों से बाहर निकलकर थोड़ी देर के लिए ठहरता है, तो उसके भीतर से यही स्वर उठता है कि वह स्वयं क्या है? क्या वह केवल एक नाम है, एक शरीर है, एक पद या संबंधों की परिभाषा है? या फिर इन सबसे परे भी उसका कोई अर्थ है, कोई ऐसी पहचान जो स्थायी है, अमिट है, और जो […] - [सोच कर देखो](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%9a-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a5%8b/): जिंदगी में सबकी सबकुछ नहीं मिलता, किसी का कुछ तो किसी का और रह ही जाता है। कोशिश करो हर दिन जीने की जिंदगी को, बीत तो ऐसे भी दिन और रात रहा है। छोटों को भी प्यार की जरूरत होती है, अपनों को अपना बनाकर रखो। छोटी छोटी बातों में ही खुशियाँ रहती है, बड़े के इंतजार में जिंदगी ही न गुजर जाए। एहम इंसान को चैन से जीने नहीं देता, लेकिन आत्म-सम्मान जरूरी है। अपने रूठते है तो मान भी जाते है, गैरों को तो मनाने की क्या जरूरत है। छोड़ तो कुछ चीजे वक्त पर, सब कुछ […] - [साहस और समझदारी की मिसाल 'शहीद भगतसिंह'](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%b8-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%9d%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%b6/): कमल-ए- बुजदिली है अपनी ही आँखों में पस्त होना,अगर थोड़ी सी जुर्रत हो तो क्या कुछ हो नहीं सकता,उभरने ही नहीं देती बेईमानिया दिल कि नहीं तो,कौन-सा कतरा है जो दरिया हो नहीं सकता। अंग्रेजी नाटककार विलियम शेक्सपियर ने कहा है, “महानता से घबराइये नहीं; कुछ लोग महान पैदा होते हैं, कुछ महानता हासिल करते हैं और कुछ लोगों के ऊपर महानता थोप दी जाती है।”ये बात भारत के शहीद-ए-आज़म भगतसिंह पर पूरी तरह से लागू होती है जो महान पैदा ही हुए थे। एक भारतीय कहावत है कि ‘पूत के पांव पालने में ही दिखाई देता है।” इस कहावत […] - [मन की बात](https://gyanvividha.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4-2/): कुछ बातें हम से सुना करों. कुछ बातें हम से किया करों। मुझे दिल की बात बता डालो, तुम होंठो को न है सिला करों । जो बात लबों तक न आए, वो ऑखो से कह दिया करो। कुछ बाते कहना मुश्किल है। तुम चेहरे को पढ लिया करो। जब तन्हा तन्हा तुम होते हो आवाज मुझे दे दिया करो।’ कुछ बातें हम से सुना करों. कुछ बातें ….. हम से ,कर लिया करों।।   - [आजादी की उड़ान](https://gyanvividha.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%a8/): उड़ान इतनी आसान न थी,न था कोई साथ।सूखे पत्ते को जीवंत करना,थी जैसे कोई बात। अड़चनें थी, फिर भी उम्मीद थी,अंधियारे में जैसे कोई जलता सा दिया।तूफान भी था, समुद्र में हलचल भी,डर भी था, फिर भी एक उम्मीद थी। मैं चलती रही, राह बनते रहे,विश्वास बढ़ता गया, मन तीव्र उद्घोष करने लगा।व्याकुल, वेग लिए,नित नए संभावनाएं तलाशने लगा। मंजिल की और बढ़ते हुए,ये जीवन नए संघर्षों को झेलता गया।दिन, सप्ताह, साल और उम्र,सब तकाजे में बैठे रहें,और मिली आजादी की उड़ान। - [आध्यात्मिकता और आधुनिकता की संगम भारतीय नारी"](https://gyanvividha.com/%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be/): यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।।औरनारी! तुम केवल श्रद्धा होविश्वास-रजत-नग पगतल में।पीयूष-स्रोत-सी बहा करोजीवन के सुंदर समतल में।मनु की मनुस्मृति (तृतीय अध्याय) में और जयशंकर प्रसाद की कामायनी में उपरोक्त पंक्तियां आदरणीय भारतीय नारी की प्रतिष्ठा, गरिमा, महिमा और महत्त्व का सशक्त हस्ताक्षर है। महिला केवल परिवार की रीढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की संरक्षक है। किसी भी सभ्य समाज की पहचान महिलाओं के प्रति उसके दृष्टिकोण से होती है। भारतीय सभ्यता, संस्कृति, संस्कार और समाज “नारी तू नारायणी है” की भावना से ओत-प्रोत एवं सदैव प्रेरित रहा है। हजारों वर्ष पहले हमारी वैदिक सभ्यता […] - [रतन टाटा: सादगी और प्रेरणा का प्रतीक](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%a8-%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%be/): रतन टाटा, भारतीय उद्योग जगत का वह नाम हैं, जो सादगी, दूरदर्शिता और समाजसेवा के लिए जाने जाते हैं। उनके नेतृत्व में टाटा समूह न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक मजबूत और विश्वसनीय ब्रांड के रूप में उभरा। टाटा परिवार से जुड़े होने के बावजूद, रतन टाटा ने कभी भी केवल पारिवारिक पहचान पर निर्भर नहीं रहे। उन्होंने अपनी मेहनत, ईमानदारी और नैतिकता से अपने लिए एक अलग पहचान बनाई, जो उन्हें दूसरों से विशिष्ट बनाती है। रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को मुंबई में हुआ था। वह जमशेदजी टाटा के परिवार से ताल्लुक […] - [बहुत कुछ छूटा सा, बचा हुआ](https://gyanvividha.com/%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%9b%e0%a5%82%e0%a4%9f%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%86/): बहुत कुछ छूटा सा, बचा हुआ,कहने को, करने को,जैसे सब रह गया।भावनाएं जो मन से लिपटी हुई,कहना चाहा था,पर दिल को थामना पड़ा। बातें कई थी, बचपन के किस्से,स्कूल, कॉलेज की बातें,घर से जुड़े जज्बात,शिकवे, शिकायतें, बहुत कुछ। करना भी बहुत कुछ था,उसके संग हंसी ठिठोली,थोड़ा लड़ाई, थोड़ी शरारत,खाना बनाना था, खिलाना भी था,प्रेम जताना भी था।हर एहसास को जीना था,साथ व्यायाम भी तो करना था। उपहार देना भी था, और लेना भी,सेवा करना भी था, करवाना भी। सबकुछ जैसे एक बिखरा हुआ स्वप्न सा हो गया,हर उस प्रेमिका का, जिसे पत्नी बनना था। - [छुअन प्रेम का](https://gyanvividha.com/%e0%a4%9b%e0%a5%81%e0%a4%85%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%be/): प्रेम जो दो दिल, दो इंसान को एक कर दे,दो शरीर होकर भी एक जान कर दे। घाव किसी एक को लगे, दूसरा घायल हो जाए,प्रेम के अगभीर सागर में, यूंही दोनो खो जाए। एक विश्वास का, सम्मान का डोर बंधता जाए,मन की उदासी हो या प्रसन्नता, उनसे जुड़ता जाए। किसी एक के बिछड़ जाने से, दूसरा जी न पाए।मृत्यु की और खींचता रहे, जीवन को सींचना भूल जाए। प्रेम के पुष्प सुगंधित इत्र की तरह, जीवन को महकाए,दोनों एक दूसरे के संग, जीवन के हर युद्ध लड़ते जाए।बस यूंही। - [गति जीवन की](https://gyanvividha.com/%e0%a4%97%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80/): जब जीवन नीरस सा प्रतीत हो,जब हर क्षण मुश्किलों का भवंर हो।जब अपना कहने को कोई नहीं,जब हर रिश्ता छले, जीवन कहर हो।उम्मीदों की आस दूर तक धुंद में हो,मृत्यु आसान, जीवन कठिन हो।चाहे जीवन के हालात कुछ भी हो,चाहे जीवन गरल हो।आत्मविस्वास के हथियार से,उसके धार के प्रहार से,जीवन पुष्प सा सुगंधित,चिर सुखद हो जाएगी।वक़्त फिर करवट लेगा,और जीवन में गति आएगी।बस यूँही। - [मन बावरा](https://gyanvividha.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be/): अंधियारे में खोया हुआ मन बावरा,नाउम्मीदी से उम्मीद लगाए हुए।तूफान कोई उठने को आतुर सी है,जल रहा, लपटे लिपटने को है।प्रेम है, या शत्रु, पास या दूर,कुछ तो है, जो जीवन जलाने को है।तृष्णा है रक्त का, या स्वांग किसी खेल का,मृत्यु का उत्पात होने को है।उठते तूफान कई जीवन के,खुशियों को खामोश करने को है।जो तुम अडिग हो अपने विश्वास पर,अपने कर्म पर, अपने धर्म पर।जीवन के उन्नति के आसमान को छूने को है।। - [महाब्राह्मण में लेखक की भारी चूक](https://gyanvividha.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a3-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ad/): त्रिलोक नाथ पांडेय की सद्य: प्रकाशित कृति ‘महाब्राह्मण’ एक सामाजिक दस्तावेज है। यहाँ उपन्यास विधा में कथानक की शिल्पकारी की गई है। लेखक द्वारा उपन्यास में अदृष्ट सूक्ष्मता को मुखरित करने की पूरी प्रक्रिया अतीव रोचक है। लेखक का लम्बा अनुभव और गहन अध्ययन यत्र-तत्र स्पष्ट है। इतिहास को सुलझाकर नया कलेवर देने में त्रिलोक नाथ पांडेय जी सिद्धहस्त हैं, यही इनकी पूर्वप्रकाशित कृतियों की अन्तर्वस्तु भी है। लेकिन इस कृति में वर्तमान अनावृत है। इसमें एक नए विमर्श का सूत्रपात हुआ है। महाब्राह्मण उपन्यास में सामाजिक विसंगति उभरी है। मृत्यु सत्य है इस सत्य की परवर्ती यात्रा में उद्धारक […] - [हिंदी साहित्य एवं नामवर सिंह की आलोचना पद्धति](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%b8/):     नवीन कहानी कला की समीक्षा प्रगतिवादी हिंदी आलोचना के एक समर्थ हस्ताक्षर के रूप में डॉ. नामवर सिंह का नाम लिया जाता है। उन्होंने आदिकालीन साहित्य से लेकर नए से नए हिंदी कवियों व लेखकों को अपनी आलोचना का विषय बनाया है। वे पृथ्वीराज रासो से लेकर मुक्तिबोध और धूमिल तक की लंबी और विशाल काव्य परंपरा को आत्मसात कर उसकी सम्यक् समीक्षा करते हैं। इनके लेखन का आरंभ अपभ्रंश से होता है किंतु नयी कविता और समकालीन साहित्य पर भी सर्वाधिक सशक्त टिप्पणी करने वालों में वे अग्रणी रहे। नामवर सिंह ने अपना आलोचकीय जीवन ‘हिंदी के […] - [चार पैसे क्यों जरूरी](https://gyanvividha.com/%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80/): हमारे समय में 11वीं में बोर्ड की परीक्षा के बाद में ही कालेज दाखिला होता था । इसलिये नवीं में ही विज्ञान , वाणिज्य या कला संकाय में से एक पर सोच विचार कर निर्णय करना आवश्यक होता ताकि तीन साल बाद यानि ग्यारहवीं के बोर्ड परीक्षा बाद स्नातक वाली पढ़ाई  उसी अनुरूप से पूरी की जा सके । सो मेरे प्रधानाध्यापक जी ने आठवीं में गणित वाले अच्छे परिणाम स्वरूप, मेरे बड़े भाई को समझा कर विज्ञान संकाय में मेरा दाखिला का आवेदन ले लिया । दस ग्यारह माह पश्चात एक दिन मेरी विज्ञान वाली पुस्तकों को देख पिताजी के ध्यान में आया […] - [अपने-बेगाने](https://gyanvividha.com/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87/): रोजाना दौड़-धूप करने के बाद तृप्ति को नये शहर में रहने का ठिकाना मिल पाया। अपने जिले के विद्यालय में नियुक्ति मिलने के बाद से ही उसने शहर के गर्ल्स हॉस्टल एवं मेस आदि में अपने लिए जगह ढूढ़नी शुरू कर दी थी। पर कहीं भी उसे अपने लिए मनपसंद कमरा नहीं मिल पा रहा था। उसके विद्यालय की अध्यापिका मिसेज शर्मा ने उसे बसंत कॉलोनी की अपनी एक पूर्व परिचित मिसेज सोनी के घर भेजा था। डरती-घबराती तृप्ति ने ज्यों ही मिसेज सोनी के घर दस्तक दी, उसके सामने भारी-भरकम शरीर की गंभीर व सलीकेदार घर की मालकिन आ […] - [सब्र का अभी तक मेरे](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87/): सब्र का अभी तक मेरे इम्तिहान जारी है, रात में चरागों का इंतजाम जारी है। रेत के महल में मेरी इक किताब रखी है, घुल रही स्याही का इन्तकाम जारी है। देखिये जहाँ पर भी चुप्पियों का जमघट है, मौन का सभी जगह इंकलाब जारी है। हर किसी में ठहरा हूँ इक आवाज बनकर मैं, हर जगह दुआओं में मेरा नाम जारी है। आजकल परिन्दा भी अब बना शिकारी है, जंगलों के राजा का ये पयाम जारी है। - [जो किस्सा अजनबी था](https://gyanvividha.com/%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%ac%e0%a5%80-%e0%a4%a5%e0%a4%be/): जो किस्सा अजनबी था जिन्दगी का, आजकल हमसफर है जिन्दगी का। कोई भी आदमी परिचित नहीं है, बड़‍ा  तन्हा सफर है  जिन्दगी  का। जो अक्सर धूप में जलकर चले थे, आजकल वो हुनर हैं जिन्दगी का। कहाँ मुश्किल है खुद का सामना भी, आईना होना भर है जिन्दगी का। कोई चेहरा बड़ा मुश्किल है पढ़ना, निगाहों में सफर है जिन्दगी का। इबादत में झुके जिसके लिये सर, देवत‍ा होना भर है जिन्दगी का। शिकायत हो या फिर कोई अदावत, हौसला करना भर है जिन्दगी का। - [हर खुशी ही रेत सी](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a5%80/): हर खुशी ही रेत सी हरदम फिसल जाती है क्यूँहर घड़ी अब जिंदगी की ग़म में ढल जाती है क्यूँ थाम कर के हाथ जिसका चाह थी आगे बढ़े़बस वही शय दौड़ कर आगे निकल जाती है क्यूँ वो जिसे था जान माना दिल दिया दिलबर कहादेख दौलत दिलरुबा वो दिल को छल जाती है क्यूँ शम्अ परवाना जले यह उनके अपने कौल थेतू बता इस बात पर यह दुनिया जल जाती है क्यूँ जाग कर जिसके लिये हमने कई शब काट दींवह घड़ी हमसे बचा दामन निकल जाती है क्यूँ कौन सा है यह चलन दिल का समझ आया […] - [अभी तो शाम बाकी है](https://gyanvividha.com/%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-2/): अभी तो शाम बाकी है जरा सूरज ये ढलने दोचले जाना कहाँ रोका है चंदा तो निकलने दो नहीं रोको नहीं मुझको मैं तो मस्ती मे आया हूँमचलते हैं मिरे अरमान उनको भी मचलने दो तुम्हारी आज फिर मुझको ए साकी याद आती हैगिरा चौखट पे हूँ जानम न मुझको अब सम्हलने दो अभी आये हो मेरे पास और जाने की कहते होभरो इक जाम तुम और आज की ये शाम ढलने दो मुझे मदहोश कर डालो सनम आगोश में ले करगिरा दो जुल्फों का साया मेरी दुनिया बदलने दो नहीं ग़म आज है कोई भले ही दम निकल जायेपिघलती […] - [साथ निभाए वही मीत है](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%8f-%e0%a4%b5%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): जीवन की यही रीत है, साथ निभाए वही मीत है।नैनों से नेह बरसे, दिल से दिल की यही प्रीत है।साथ निभाए वही मीत है जीवन पथ पर संग चले, सुख-दुख में साथी हो।हर आंधी तूफानों में, प्रेम पाले दीपक बाती सो।डगर डगर पे गुनगुनाते जाए, प्यार भरा गीत है।जिंदगी की डगर सुहानी, धड़कने सुर संगीत है।साथ निभाए वही मीत है नैनों की भाषा जाने, दिल की धड़कनें पहचाने।अधरो पर आने से पहले, शब्दों का संसार जाने।संघर्षों में संबल हो, मिल जाती हर बार जीत है।राहों में बढ़ते रहना, पथिक पथ की यही रीत है।साथ निभाए वही मीत है हौसलों की […] - [साज़े-दिल पर ग़ज़ल गुनगुना दीजिए](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%a8/): साज़े-दिल पर ग़ज़ल गुनगुना दीजिएशामे-ग़म का धुँधलका हटा दीजिए ग़म के सागर में डूबे न दिल का जहाँनाख़ुदा कश्ती साहिल पे ला दीजिए एक मुद्दत से भटके लिए प्यास हमसाक़िया आज जी भर पिला दीजिए इल्तिजा कर रहा है ये रह-रह के दिलफ़ासला आज हर इक मिटा दीजिए कर रही हैं बहारें भी सरगोशियाँमन का पंछी हवा में उड़ा दीजिए मुन्हसिर आपकी हम तो मर्ज़ी पे हैंआपके दिल में क्या है बता दीजिए दोनों घुट-घुट के इक दिन न मर जायें यूँबात बिगड़ी हुई अब बना दीजिए अपनी मंज़िल की जानिब रहूँ गामज़नमेरे जज़्बात को हौसला दीजिए इन अंधेरों में […] - [अभी बहकना है यार बाकी](https://gyanvividha.com/%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%80/): अभी वो निकली है मयकदे से अभी बहकना है यार बाकीअभी कदम पड़ रहे सही है अभी फिसलना है यार बाकी अभी बहारों के साये उसपे पड़े है केवल ज़रा ज़रा सेअभी बनी है कली से गुल वो अभी महकना है यार बाकी अभी अभी लड़खड़ाना उसका ज़रा ज़रा सा शुरू हुआ हैअभी नशे के है लुत्फ़ में वो अभी सँभलना है यार बाकी अभी तो उसने नई डगर पे है आ के अँगड़ाई एक ली हैअभी अभी तो खुलीं हैं पलकें अभी चहकना है यार बाकी चला के अपनी नज़र का ज़ादू किया है मदहोश उसने सबकोअभी है दीवानगी […] - [एक दिन आयेगा](https://gyanvividha.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-2/): एक दिन आयेगाऔर हम सब चले जाएंगे। कहां जायेंगेपता नही । पर उस टाइम कोईरोने वाला नही होगा। पर कोने में पड़ी होंगीकुछ कविताएं। जो लिखी गई थीशायद इसी दिन के लिए । ताकि जब कुछ न बचेतब बच जाएं कविताओं के अवशेष। और जब कोई बोल न पाएऔर नाही सुन पाए कुछ । तब उस समय में भीपढ़ी जा सके कविताएं। और पढ़ कर के उनकोनिहारा जा सके एक दूसरे को । क्योंकि सब कुछ तो चला जायेगाकविताओं में लिखा प्रेम अमर है। - [मजदूर](https://gyanvividha.com/%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0-2/): मैएकइंसानआप जैसामेरे दिल मेंभी तो पलता हैअरमान आप सामहनती भी हू मैवफा दार भी हूँकाम के प्रतिमजदूरही हूँ मैसच्चाजी मैंएकजीवटश्रमजीवीअपने बूतेपोषित करताअपना परिवारतकलीफ से सहीपर रहता हैअात्म संतोषश्रमिक हूँभिखारीनहींमैं मेरा हक मुझेयूँ फेक करमत दीजिएसाहिबयह मेरे पसीनेकी कीमत हैकोई आपकीदयानतदारी नहीमैने किया हैसहयोगआपकाऔर उसकेबदले मेंले रहा हूँआपसेउसकाउचित मूल्यऔर दिल सेआकांक्षी भी हूँअपनीकमाई कोबाइज्जतपाने कायह मेरीमजदूरी हैदीजिए इसेअपने हाथ सेमेरे हाथों मेक्योंकि मैंमेहनतकशमजदूर हूँसाहिबभिखारी नहीं - [श्रमिक दिवस को समर्पित-गीत](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%97%e0%a5%80-2/): तुम वर्तमान के पृष्ठों पर ,पढ़ लो जीवन का समाचार ।क्या पता कौन से द्वारे से ,आ जाये घर में अंधकार।। आशा की किरणें लौट गयीं ,बैठी हैं रूठी इच्छायेंप्रात: से आकर पसर गईं ,आँगन में कितनी संध्यायेंइन हानि लाभ की ऋतुओं में, तुम रहो सदा ही होशियार ।।तुम वर्तमान—– चल पड़ो श्रमिक की भाँति यहाँ, छेड़ो जीवन का महासमरअवसान हताशा का कर दो ,सुरभित हों मरुथल गाँव नगरश्रमदेवी कर में भेंट लिये ,आयेगी करने चमत्कार ।।तुम वर्तमान——– प्राची ने शंख बजाया तो ,कर्तव्यों का दिनमान चलफिर कलश उठाये हाथों में ,जीवन क्रम का अभियान चलाहर गली मोड़ चौराहों पर […] - [ज़ब दिल दिल से मिलता है](https://gyanvividha.com/17831-2/): बहुत होता सुकूँ तब है कि ज़ब दिल दिल से मिलता हैअदब का हर नज़ारा तब तिरी महफ़िल से मिलता है तिरे पे मर मिटा हूँ मै सनम दिल ज़ान ईमां सेतिरा चेहरा ए ज़ान ए मन मिरे कातिल से मिलता है ज़िगर में भाव उठते हैं तुझे पा कर सनम ऐसेकि जैसे जब सफीना ज़ानेमन साहिल से मिलता है मिरे आगोश में तू आता है तब सोचता हूँ मैंमुहब्बत का हँसी पल ये बड़ी मुश्किल से मिलता है मगर जब बेवज़ह ही तू फिरा लेता है रुख़ अपनाचलन ये तेरा तब ज़ाने ज़िगर संगदिल से मिलता है ये माने […] - [अगरचे हौसला मिट जायेगा](https://gyanvividha.com/17828-2/): कर्म करने का अगरचे हौसला मिट जायेगाकामयाबी का तो समझो फ़लसफ़ा मिट जायेगा सोच से जब प्यार औ दिल से ख़ुदा मिट जायेगाइंसानियत हैवानित का फ़ासला मिट जायेगा जिस घड़ी जेहन से अहसासे वफ़ा मिट जायेगाये जहां रब की कसम बेसाख़्ता मिट जायेगा क्या बचेगा जिंदगी में सोच कर तो देखियेजो दिलों से अपनेपन का सिससिला मिट जायेगा जब ज़फ़ा करने लगेगा तू मुहब्बत में सनमबस उसी दिन तेरा मेरा राब्ता मिट जायेगा बज़्म में तेरी रकीबों की हुई आमद तो फिरये तेरा दीवाना भी हो के फ़ना मिट जायेगा मेरी इस उल्फ़त के बदले जानेमन बतला मुझेराज का हर […] - [मुहब्बत आजमाना चाहता है](https://gyanvividha.com/17825-2/): मुहब्बत आजमाना चाहता हैये दिल पक्का ठिकाना चाहता है किसी की झील सी आँखों में जा केमेरा दिल डूब जाना चाहता है गया हैं तोड़ कर दिल बेवफ़ा जोउसे वापस बुलाना चाहता है फ़िदा है इस कदर दिल दिलरुबा पेये फ़िर से चोट खाना चाहता है दुआ जिसके लिए दिन रात की वोमेरे को छोड़ जाना चाहता है हमेशा करता ही रहता है रुसवान जाने क्या ज़माना चाहता है लगाई आग जो तूने मेरा दिलउसी में कूद जाना चाहता है मेरे अश्आर हैं मेरी कहानीये दिल सबको सुनाना चाहता है तू बन के मौत आ या जिंदगी आतुझे दिल राज […] - [पतझड़ सावन बन जाता है](https://gyanvividha.com/%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%9d%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-2/): दुआओं से झोली भरकर जब जीवन मुस्कुराता है।सारी बलाएं टल जाती पतझड़ सावन बन जाता है।पतझड़ सावन बन जाता है रोज शिवालय शिव की पूजा गंगाजल जो पाता है।हर हर महादेव कंठो से सुबह शाम जो भी गाता है।बिगड़े सारे काम बनते वो कीर्ति पताका लहराता है।शिव कृपा हो जाए बंदे खुशियों का मौसम आता है।पतझड़ सावन बन जाता है मात पिता गुरु सेवा का चरणों का सुख पाता है।अतिथि को देव मानकर घर स्वर्ग सा हो जाता है।रिश्तो की डोर संभाले संस्कार जो सीखलाता है।प्यार के अनमोल मोती हंस हंसकर जो लुटाता है।पतझड़ सावन बन जाता है आदर्शों की […] - [रह जाते हैं](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b0%e0%a4%b9-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82/): यादों के आईनों में रह जाते हैं ।जाने वाले आंखों में रह जाते हैं । ख़ुशबू बन कर उड़ते हैं फिर बाग़ों में ।तितली के पर फूलों में रह जाते हैं । बादल आंखों को छलका कर चल देते ।नन्हे मोती झीलों में रह जाते हैं । झूठी बातें सारी बाहर आ जातीं ।सच्चे किस्से महलों में रह जाते हैं । शायर मर कर भी जीते हैं दुनिया में ।उनके चेहरे ग़ज़लों में रह जाते हैं । कितनी बूंदें सागर बन जाया करतीं ।कितने सागर बूंदों में रह जाते हैं । बच्चे चल देते मुस्तक़बिल की जानिब ।बचपन उनके गलियों […] - [](https://gyanvividha.com/17818-2/): एक ग़ज़ल मेरे ताज़ा संग्रह ” क्या मुश्किल है ” से ….. सामने बैठी रहो तुम इक ग़ज़ल हो जाएगी ।ज़िन्दगी मेरी यक़ीनन अब सफल हो जाएगी । रेशमी अरमान सारे सौंप कर देखो मुझे ।याद की सूनी हवेली फिर महल हो जाएगी । तुम कभी ना चाहना मुझको तुम्हे मेरी कसम ।वरन मेरी ज़िंदगी कितनी सरल हो जाएगी । रंग मैं अपना भरूंगा, रूप तुम देना उसे ।कल हमारी कल्पना बिल्कुल नवल हो जाएगी । छाँह दे दो गेसुओं की तुम मेरे एहसास को ।ज़िन्दगी भर की पहेली आज हल हो जाएगी । बीज मैंने बो दिए हैं सींच […] - [सम्हालो](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%8b/): ये रंगीन कागज़ के रिश्ते सम्हालो ।तुम अपनी वफ़ाओं के तिनके सम्हालो । महकने से पहले कहीं झर न जायें ।मुहब्बत के मासूम गुंचे सम्हालो । हज़ारों निगाहें तुम्हे घूरती हैं ।कहीं उड़ न जायें दुपट्टे सम्हालो । हमें अब करो तुम लहर के हवाले ।वो महफूज़ उम्दा किनारे सम्हालो । वो ख़ुशबू मेरी ले के जाने लगे हैं ।औ कहते हैं हमसे कि काँटे सम्हालो । तुम्हे कल को इनकी ज़रूरत पड़ेगी ।हमारी दुआ के उजाले सम्हालो । तुम्हे एतबारे मुहब्बत नहीं था ।तुम अपने अमल के नतीजे सम्हालो । ……………… ग़ज़ल-संग्रह- ” क्या मुश्किल है ” से ….. - [हम से मुँह फेर कर](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b9%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%81%e0%a4%b9-%e0%a4%ab%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b0/): हम से मुँह फेर कर चाँदनी जा चुकी ।जी रहे हैं मगर ज़िन्दगी जा चुकी । फूल सारे चमन के उसे दे दिए ।इन हवाओं की भी ताज़गी जा चुकी । नक़्श पा बस कहारों के बाक़ी रहे ।ख़ुशबुओं से भरी पालकी जा चुकी । दिल में ख़ामोशियों की कतारें लगीं ।खिलखिलाती हुई हर ख़ुशी जा चुकी । हम थे पत्थर किनारे पे बैठे रहे ।वक़्त की झिलमिलाती नदी जा चुकी । पर कटे पल जुदाई के टलते नहीं ।तितलियों सी मिलन की घड़ी जा चुकी । जब से रुख़सत हुई है ग़ज़ल रूह की ।सिर्फ़ अल्फ़ाज़ हैं शायरी जा […] - [ग़ज़ल:-अगर कह दो](https://gyanvividha.com/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b9-%e0%a4%a6%e0%a5%8b/): इसी तस्वीर के कदमों में दिल रख दूं ,अगर कह दो ।तुम्हे अपनी मुहब्बत का ख़ुदा मानूं , अगर कह दो । तराशे लब, हसीं आंखें , परी चेहरा , ये तुम हो क्या ।तुम्हे देखूँ ,तुम्हे चाहूँ , तुम्हे पूजूँ ,अगर कह दो । ये चेहरा उफ़्फ़ कि महका हो कोई गुलशन पहाड़ों पर ।तुम्हे एहसास के पंखों से मैं छू लूँ ,अगर कह दो । मेरे सारे ख़यालों से भी ज़्यादा ख़ूबसूरत हो ।तुम्हे अशआर के ज़ेवर मैं पहनाऊं ,अगर कह दो । तुम्हारी याद की डल झील में गहरे उतर जाऊं ।तुम्हारे ज़ाफ़रानी इश्क़ को जी लूँ […] - [जीवन](https://gyanvividha.com/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-2/): जीवन पुष्पों की पंखुड़ी जैसी नहीं होती,यंत्रणा देने वाली कांटे, चुभती रहती है।मृत्यु की सेज में जो जाना भी चाहों,न जाने क्यों, ज़िंदगी और लंबी होने लग जाती।इम्तिहान कई अभी और है बाकी,अभी कई किले फतह करना है।कांटों के नोख चाहे चुभे,चाहे जख्म जितने गहरे दें।अभी उम्मीद ए ज़िंदगी की रोशनी को ओढ़े रहना है।। - [दीपावली का महत्त्व](https://gyanvividha.com/%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5/): ज्ञान का दिया अज्ञान के अंधकार को दूर करने के लिए जरूरी है। ज्ञान की एक रोशनी अंधेरे और सुने पड़े हुए कई कोनो को रौशन कर देती है। एक दीप से कई दीप जगमगाने लगते है। तरक्की के कई सोपान खुलने लगते है। अच्छी किताबें पढ़ना, अच्छे लोगों से बात चीत करना, अपनी जानकारी से दूसरों की जिंदगी को आसान बनाना, हमें लगातार समृद्धि की ओर ले जाता है। दीपोत्सव का आध्यात्मिक और दार्शनिक भाव है असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय, यानी कि अज्ञानता के अंधकार से मुक्त करके ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाने के पर्व। […] - [जीवन के प्रति हमारा नजरिया](https://gyanvividha.com/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af/): जीवन का सफर एक अद्भुत यात्रा है, जहां हर दिन, हर अनुभव, और हर चुनौती हमें कुछ नया सिखाती है। इस यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम जीवन को किस नज़रिए से देखते हैं। हमारा नजरिया ही हमारे विचारों, भावनाओं और कार्यों को प्रभावित करता है, और अंततः हमारे जीवन के परिणाम को निर्धारित करता है। नजरिया का सीधा सा अर्थ होता है कि हम किसी चीज़, व्यक्ति, परिस्थिति, या जीवन को कैसे देखते हैं। यह हमारी सोच, विश्वास, और दृष्टिकोण से निर्मित होता है। जीवन के प्रति नजरिया हमारे व्यक्तिगत अनुभवों, सामाजिक परिवेश, संस्कारों और शिक्षा […] - [जलाए ज्योत अन्तर्मन की](https://gyanvividha.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%8f-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a4-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80/): अक्सर हम जीवन में बाहरी रोशनी और चकाचौंध की ओर आकर्षित होते हैं, लेकिन असली प्रकाश उस अंतर्मन में छिपा होता है, जो हमें सच्चाई, शांति, और संतोष का अनुभव कराता है। यह अंतर्मन की ज्योत एक ऐसा प्रकाश है, जो हमें आत्म-ज्ञान और सही दिशा दिखाने में सहायक होता है। बाहरी उपलब्धियों से आगे बढ़ते हुए, जब हम अंतर्मन की ओर यात्रा करते हैं, तो हम अपनी वास्तविकता से परिचित होते हैं और सच्चे सुख की अनुभूति पाते हैं। अंतर्मन की ज्योत का अर्थ है आत्मा का वह प्रकाश जो जीवन के हर अंधेरे में हमारा मार्गदर्शन करता है। […] - [Mind and how can we control it](https://gyanvividha.com/mind-and-how-can-we-control-it/): Mind is mysterious something which is really nothing but does everything. Just as a busy officer alone in a room by closing all the doors, so also the busy mind works alone in a dream by shutting out all the doors of the senses. Mind is a power born of the soul. It is through mind that the Lord manifests Himself as the differentiated universe with heterogeneous objects. Mind is merely a bundle of thoughts. Of all thoughts the thought ‘I’ is the root. Therefore, mind is only the thought ‘I’. Mind is nothing but a collection of Samskaras or […] - [सभी के लिए योग, रखें सबको निरोग](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97-%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%ac%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a8%e0%a4%bf/): भारत में योग का महत्व बहुत अधिक है। योग भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहाँ की धार्मिक और दार्शनिक परंपराओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। योग का उद्भव भारत में हुआ था और यहाँ के साधकों और ऋषियों ने इसे विकसित किया और उसकी विशेषता बनायी। आजकल, योग भारत की पारंपरिक चिकित्सा विधि के रूप में और वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर एक प्रभावी स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा के रूप में विकसित हुआ है। योग एक प्राचीन भारतीय अभ्यास है जिसमें शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास को संतुलित करने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता […] - [महलों से आती आवाजें](https://gyanvividha.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%82/): महलों से आती आवाज़ें राजाओं के महल शांति के प्रतीक नहीं हैं खून के छींटों से निर्मित हैं कितने ही कर लगाये गयें होंगे आवाम के जबड़ों पर तब जाकर खड़ी हुई होंगी ये अनसुनी दीवारें महल के हर झरोखे से ताजी हवा नहीं एक गंध आती हैं स्त्री गुलामी की महल की नींव पत्थरों पर नहीं हैं वो खड़ी है सर्वश्रेष्ठ मजदूरों की मेहनत पर राजाओं के महल की दीवारें शौर्य सें नहीं जगंल के विज्ञापन से ढ़की हैं कितने ही शेर धोखे से मारे गए होंगे फिर बनाई गई होगी एक वीरकहानी मगर दीवारों को सब पता हैं […] - [शिवानंद सरस्वती: एक महान योगी](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%af/): स्वामी शिवानन्द सरस्वती का जन्म दक्षिण भारत मे ताम्रपर्णी नदी के पास पट्टामड़ाई नाम के गांव में 1887 को हुआ था. इनके बचपन का नाम कुप्पु स्वामी था. कुप्पु स्वामी के पिता का नाम श्री पी.एस. गहवर था जोकि एक तहसीलदार थे. माता का नाम पार्वती अम्मा था. माता-पिता दोनों ही धार्मिक प्रवृति के थे और ईश्वर के प्रति श्रद्धा रखते थे. इसका प्रभाव शिवानन्द स्वामी पर भी पड़ा. बचपन से ही उन्होंने वेदांत का अध्ययन और अभ्यास किया और बाद में चिकित्साविज्ञान का अध्ययन भी किया. इसके बाद वे 1913 में मलाया में डाक्टर के रूप में लोगों की […] - [भारतीय ज्ञान परंपरा](https://gyanvividha.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be/): किसी भी सभ्यता या संस्कृति का उत्थान-पतन उसकी आर्थिक स्थिति और राजनैतिक स्थिति नहीं होती बल्कि ज्ञान परम्परा होती है। भारतीय संस्कृति ने हमेशा ही ज्ञान परंपरा को महत्त्व दिया है। चिंतन की प्राचीन परम्परा ‘उपनिषद’ अर्थात गुरु के पास बैठकर अज्ञान की स्थितियों को नष्ट कर ज्ञान को निरंतर संवाद द्वारा पाने की परम्परा रही है। भारतीय ज्ञान परम्परा का सबसे बड़ा आधार वेद है। ज्ञान का यह स्वरूप तर्कमूलक, मूल्यनिष्ठ और आचरण सापेक्ष है, जिज्ञासामूलक है, और सामाजिक उद्देश्यों से बंधा हुआ है। चिंतन का अर्थ यहाँ मुक्तकामी है। मुक्ति का तात्पर्य यहाँ रूढ़ अर्थों में आध्यात्मिक मुक्ति […] - [वो बचपन वो माँ का प्यार](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%aa%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0/): वो बचपन और माँ का प्यार, बाबुल का आँगन और वो दुलार। पापा से पैसे की ज़िद करना, माँ का हर बात पर समझाना। स्कूल जाते समय तैयार करना, टिफ़िन बनाकर बस्ते मे भरना। वो सब याद आता है माँ आज भी, आ जाती है यादें तेरी रोज़ माँ। लेकिन तुम नहीं क्यों नहीं आती। जब थक जाती हूँ काम करते करते, तुम्हारी बहुत याद आती है माँ। तुम्हारा बचपन में मेरी छोटी बनाना, सुंदर-सुंदर कपड़े खरीद कर लाना। सब बहुत याद आता है माँ, वैसे तो फोन पर हो जाती है। ढेरों बातें दिन भर में तुमसे, लेकिन पास […] - [अंहिसा का पुजारी](https://gyanvividha.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): अंहिसा का पुजारी चला गया हिंसा से तड़फकर “हे राम” प्रतिध्वनि के साथ छोड़ गया ….एक गर्मागर्म आज़ादी एक तनी निडर लाठी एक नमक के ढ़ेले को पुकारती ..दांडी अंहिसा से कुलाचें मारता एक हिरण छोड़ गया एक असहयोग …..हुकूमत को डराने के लिए, बिखेर गया जाते -जाते सत्य की केसर….भारत के बदन पर, दे गया सविनय से भरी आज्ञा धमकी …हुकूमत के कानों पर, हमको दे गया.. चरखे से बनी कपड़े की कहानी , दे गया एक पथिक को ….बेखौफ सत्याग्राही सफर मजदूरों में फूँक गया ..हड़ताल की आत्मा, भर गया एक आंदोलन…..अस्वर गुलामों के गलों में लिख गया […] - [चिंता की छाँव में (नाटक)](https://gyanvividha.com/%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9b%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%b5-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a4%95/): पात्र: प्रथम दृश्य: घर का आँगन (मां चूल्हे के पास बैठी है, सूरज पास में बैठा है।) मां (थकी आवाज़ में): बेटा, प्रिया की शादी की चिंता दिन-रात खाए जा रही है। तुम्हारे बाबूजी की हालत भी ठीक नहीं रहती। सूरज (सोचते हुए): हां मां, प्रिया की शादी अब जरूरी हो गई है, लेकिन पैसे का इंतजाम कैसे होगा? अजय भैया को तो इन बातों से कोई मतलब ही नहीं है। (बाबूजी घर के कोने में बैठकर cough करते हैं।) बाबूजी (धीमी आवाज़ में): अब समय आ गया है कि इस परिवार की जिम्मेदारी उठाने का समय है, पर मेरे […] - [नालायक बेटा](https://gyanvividha.com/17360-2/): एक गाँव था, जहाँ एक मेहनती किसान, रामप्रसाद अपने चार बेटों के साथ रहता था। वह बचपन से अपने खेतों में पसीना बहाते हुए अपने परिवार का पेट पालता रहा। रामप्रसाद ने जीवन में एक ही सपना देखा था—अपने बेटों को पढ़ा-लिखा कर एक अच्छे मुकाम पर पहुँचाना, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो। उसकी मेहनत रंग लाई, और तीन बेटे पढ़ाई में अच्छे निकले। बड़े बेटे सुरेश ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, मंझला बेटा राकेश डॉक्टर बना और तीसरा बेटा मुकेश बैंकर बन गया। लेकिन सबसे छोटा बेटा, हरि, जिसने ठीक से पढ़ाई नहीं की, गाँव में ही रह गया। […] - [ हमारी सार्थकता](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be/): कहा जाता है की 84 लाख योनियों को पार करने के बाद मनुष्य का जन्म हमें प्राप्त होता है। मनुष्य जन्म मिलना ही एक सौभाग्य की बात है। मनुष्य को ही इतना सुंदर शरीर, दिमाग, काम करने के लिए हाथ, जिससे वह सुंदर-सुंदर वस्तुओं का निर्माण कर सकता है। उसके पास ही दिमाग है, जिससे वह अपना तो अच्छा कर ही सकता है, साथ मे समाज और अपने देश का भी उत्थान कर सकता है। इतनी सुंदर प्रकृति मिली है उसे जिसका वह प्रयोग अपने लिए करता है। बाकी के सभी जानवर ये सब नहीं कर पते है। फिर भी […] - [संकल्प की शक्ति](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%aa-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): संकल्प की शक्ति अपार, मन के भीतर बहती धार। जीवन की हर कठिन घड़ी में, संकल्प बने दीपक की ज्योति। हर मुश्किल को सरल बना दे, राह की ठोकर भी मिटा दे। संकल्प करके जो कोई कार्य करे, वो जीत का मार्ग सदा चुने। हौसले कभी कम होने न दे, बंद रास्ते को खोलकर रखे। मन में विश्वास जगा दे यूं, सपनों को हकीकत बना दे। न हार मानो, न रुको कभी, संकल्प की डोर को थामो सभी। यह जोश है, यह विश्वास है, संकल्प से हर संभव प्रयास है। - [पहचान](https://gyanvividha.com/%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a8/):   “पहचान” शब्द सुनते ही मन में सवाल उठता है – आखिर हमारी पहचान क्या है? क्या यह केवल हमारा नाम है, जो हमें दूसरों से अलग करता है? क्या यह हमारे काम या सामाजिक स्थिति तक सीमित है? या फिर पहचान का अर्थ इससे कहीं अधिक गहरा और व्यापक है? पहचान केवल बाहरी स्वरूप, नाम, या सामाजिक पहचान तक सीमित नहीं होती। यह हमारी आंतरिक सोच, भावनाओं, अनुभवों, और जीवन के प्रति दृष्टिकोण का एक अदृश्य आईना है। पहचान वह तत्व है जो हमें खुद से और समाज से जोड़ता है, और जो हमारे अस्तित्व को एक विशेष अर्थ […] - [बेटियां](https://gyanvividha.com/%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%82-3/): बेटियां, चंचल, कोमल, प्यारी सी, घर के आंगन को मेहकाती, फुलवारी सी। चहकती रहती है घर में दिन भर, गौरैया जैसी प्यारी सी। मत छीनो इनसे इनका बचपन, कर लेने दो इनको मनमानी भी। गर मिल जाए अच्छा ससुराल तो ठीक है, नहीं मिला तो नही रह पाएगी, खुशहाली भी। छोटी छोटी ख्वाहिश होती है इनकी, कर दो ना पूरी, नही मांगती ये तुमसे सोना चांदी भी। हार जाती है बेटी अपनों से ही लड़ते लड़ते, छोड़ देती है फिर वो ये दुनिया सारी भी। - [स्वच्छता रखना हमारा धर्म है।](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9b%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae/): स्वच्छता है धर्म हमारा, इससे बनता जीवन सारा। घर हो या गलियाँ, साफ रखो, गंदगी को सबसे दूर करो। नदियों में कचरा मत डालो, प्रकृति को स्वच्छ ही रहने दो। पेड़-पौधे हरे भरे, स्वच्छ हवा, जीवन को स्वस्थ रखे। कचरा मत सड़कों पर फेंको, डस्टबिन में ही कूड़ा डालो। साफ़ रखो अपनी धरती, यही है हमारा सच्च धर्म। स्वच्छ मन, स्वच्छ हो तन, यही है स्वच्छता का अमृत जल। स्वच्छ देश, महान बनेगा, हर कदम पर जीवन खिलेगा। आओ मिलकर कसम उठाएं, भारत को स्वच्छ बनाएं। स्वच्छता का पाठ पढ़ाएं, हर कोने को सुंदर बनाएं। - [ सीधा और सरल व्यक्तित्व होना भी एक चुनौती है](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%b2-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%b9%e0%a5%8b/): आज का विषय है कि क्या सीधा और सरल व्यक्तित्व होना भी एक चुनौती है। मेरा जवाब है; हाँ। प्रत्येक मनुष्य का स्वभाव भिन्न भिन्न होता है और जो स्वभाव या व्यक्तित्व निर्मित हुआ है, उसके शिक्षा, परिवेश और उसके आस पास के वातावरण है। जरूरी नहीं है कि आपके स्वभाव को सामने वाला समझे ही, चाहे आपका व्यक्तित्व सरल हो या जटिल। यह अधिकतर सामने वाले की मानसिकता पर निर्भर करती है कि वह आपके बारे में क्या सोचता है। आप जैसे भी है आपका व्यक्तित्व जैसा भी है, दूसरा व्यक्ति अपने हिसाब से ही आपका मूल्यांकन करेगा। आप […] - [जिंदगी का सफर](https://gyanvividha.com/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ab%e0%a4%b0/):   जिंदगी का सफर आसान नहीं होता। यहां हर कोई अच्छा इंसान नही होता। अकेले है चलना पड़ता है सब राहों पर, यहां कोई किसी के साथ नही होता। लेती है जिंदगी इम्तेहान हरपल हर घड़ी, चाहे कैसा भी हो सफर आसान नहीं होता। खुद को इस काबिल बनाओ लोग मिसाल दे। गर न मिले शोहरत तो परेशान न होना। सफर है ये जिंदगी का कट ही जायेगा। लेकिन कभी किसी के साथ गलत बात मत करना। हो जाए गर गलती तो मांग लेना माफी। नहीं मिले तो फिर भी परेशान मत होना। छूट जाता है सब यही पर, कुछ […] - [हो जाए मेरी अभिलाषा पूरी](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%8f-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80/):   छोटी सी है मेरी अभिलाषा, छोटा सा घर हो मेरा, ऊपर प्यारा सा नेम प्लेट मेरे नाम का। घर के बाहर बड़ा सा बगीचा हो, खूब फल फूल लगे हो उसमे। कर पाऊं में सबकी मदद, दोस्तों से मिलकर उनसे मन की बाते करू। अपने माता पिता की सेवा कर सकू। मुश्किल है बहुत राह ये मेरी, लेकिन लगता है मुझे ये सब भी जरूरी। हो जाए मेरी अभिलाषा पूरी, ना रह जाए मेरी अभिलाषा अधूरी।   - [हिन्दी हमारी शान है।](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a5%a4/): हिन्दी भाषा हिन्द की, सरल सुगम पहचान। मीठी वाणी मृदुल है, हिन्दी का सद्ज्ञान।। हिन्दी मेरी आन है, हिन्दी मेरी बान। जन-जन की है आत्मा, भारत की है शान।। भाषा माटी हिन्द की, खुशबू भरी सुगंध। सदियों से इस देश की, सोंधी माटी गंध।। हिन्दी का सम्मान हो, सबकी यह अरमान। राष्ट्रीय-भाषा हिन्द ही, हिन्दी का सम्मान।। हिन्दी सागर ज्ञान का, सबको राह दिखाय। श्रोत रही सद्भावना, रहे दिलों को भाय।। हिन्दी भाषा मांग है, सिन्दूरी सम्मान। शब्द-शब्द में है बसी, मनभावन वरदान।। हिन्दी की ध्वनि हिन्द है, यह भारत की जान। सभी जनों संपर्क हो, हिन्दी बने महान।। मिली […] - [साहित्य समाज का दर्पण](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a3/): साहित्य बने दर्पण समाज का, अंधेरे मे बने रोशनी की किरण। भावों की बहती गंगा इसमे, जो डूबता तर जाता इसमे, समाज की आत्मा है साहित्य, लोगों को रास्ता दिखाता है। साहित्य को रचकर ही, मनुष्य स्वजीवन में उन्नति कर पता है। मिले सम्मान सभी साहित्य कारों को, समाज को वह सही रास्ता दिखाता है। सजग कर समाज को वह अपना कर्तव्य निभाता है। सही दीशा समाज को साहित्य दिखाता है। साहित्य है दर्पण समाज का, सबमें आशा की किरण जागता है। - [विश्व में हो हिन्दी का सम्मान](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d/): विश्व में हो हिन्दी का सम्मान हिंदी है अपनी शान, हिंदी है अपनी पहचान, विश्व में फैलाएँ इसे, यही है अपना अरमान। भाषाओं की रानी है, हर दिल की कहानी है, बड़े प्रेम से बोलें हम, हिंदी अपनी बानी है। गंगा जैसी निर्मल, हिमालय जैसी महान, हिंदी के शब्दों में छुपा है, जीवन का ज्ञान। संस्कृति की पहचान है, भारत की यह जान है, विश्व में हिंदी को बढ़ाएं, यही हमारा अभियान है। आओ मिलकर प्रण करें, हिंदी को आगे बढ़ाएं, हर देश में हिंदी बोलें, ऐसा वातावरण बनाएं। विश्व हिंदी दिवस पर, यही है हमारी पुकार, हिंदी को दे […] - [शिक्षक: प्रकाश के समान](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8/): शिक्षक: प्रकाश के समान ज्ञान का दीपक जलाते हैं, अज्ञान का अंधकार मिटाते हैं। जीवन को देते हैं दिशा, सपनों को आकार बनाते हैं। हर छात्र में एक संभावना, उसे साकार रूप में लाते हैं। अनुशासन, नैतिकता, और प्रेम, इन मूल्यों को सिखाते हैं। शिक्षक हैं वो मार्गदर्शक, जो हमें सही राह दिखाते हैं। बिन शब्दों के समझते हैं, हर दिल की बात जान जाते हैं। समर्पण से कर्म करते हैं, हर कठिनाई में साथ देते हैं। माता-पिता से भी बढ़कर, शिक्षक हमें संवारते हैं। अभिवादन है उन शिक्षकों को, जो जीवन में उजाला लाते हैं। शब्द कम हैं, भाव […] - [एक स्वाभिमानी स्त्री](https://gyanvividha.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80/): वो पढ़ी, अथक् प्रयास किये,फिर वो आत्मानिर्भर बनी,अपने पैरों पर खड़ी हुई।उसने अपना और अपने माँ पापा का,मान बढ़ाया, सम्मान किया,ज़िम्मेदारी निभाई। कहाँ वो चुक जाती है,क्या स्त्री होना अपराध है??अक्सर कुछ लोग बहुत कुछ अपशब्दों मे ताना कस्ते।ऊँचे पद पर आसीन हो,या कहीं काम कर अपना गुजारा करने वाली।वो लोगों के फब्तियान,उनके खुद के बुरे कर्मो में लिप्त होने के प्रतिक होते,या पुराने सोच की। काश के लोगों के सोच, समझ और कर्मो में इंसानियत होती,हवसी प्रवृति ना होती, खुद पर सैयम होता।स्त्री जाति के प्रति सम्मान होता,तो आज देश में बलात्कार ना होते। अगर देश में न्याय व्यवस्ता […] - [नशा](https://gyanvividha.com/%e0%a4%a8%e0%a4%b6%e0%a4%be/): नशा किसी भी प्रकार का हो, व्यक्ति के विनाश का कारण बनाता है। आज समाज में नशा करने के समान बहुत आसानी से मिल जाते है। नशा ऐसी चीज़ है जिससे न सिर्फ अपना बल्कि अपने पूरे परिवार का नुकसान कर देता है। इस नशे की लत ने न जाने कितने परिवार उजाड़ दिये, न जाने कितनी जाने चली गई। ऐसा नहीं है कि जो नशा करता है उसे पता नहीं होता, लेकिन जब वह एक बार इस दलदल में फंस जाता है तो उसका निकालना मुश्किल होता है। इसलिए मनुष्य को इससे दूर ही रहना चाहिए। कई बार ऐसा […] - [खुद सा होना](https://gyanvividha.com/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%a6-%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a4%be/):   खलील जिब्रान कहता है- कुछ वर्ष पहले की बात है। मैं एक पागलखाने के बगीचे में टहल रहा था। टहलते हुए मेरी मुलाकात एक ऐसे नौजवान से हुई, जो दर्शनशास्त्र की किताब पढ़ रहा था। उसका व्यवहार और अच्छा स्वास्थ्य उसे उस पागलखाने के दूसरे कैदियों से अलग बना रहा था। उत्सुक होकर मैं उसके पास बैठ गया और उससे पूछा : ‘तुम यहां पर क्या कर रहे हो ?’ उसने हैरानी भरी निगाहों से मुझे देखा। फिर यह देखकर कि मैं वहां कार्यरत डॉक्टरों में से नहीं हूं, उसने कहा : ‘इसका जवाब बहुत सरल है। मेरे पिता […] - [विश्वास की शक्ति](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): विश्वास एक ऐसा अदृश्य बल है जो जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है। यह वह शक्ति है जो इंसान को अंधकार से निकालकर उजाले की ओर ले जाती है, असंभव को संभव बनाती है, और हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए प्रेरित करती है। विश्वास न केवल आत्मविश्वास को जन्म देता है, बल्कि यह हमें दूसरों पर, समाज पर, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से, ईश्वर पर विश्वास करने की शक्ति भी प्रदान करता है। विश्वास की शक्ति असीमित है। यह एक ऐसा बीज है, जिसे अगर सही तरह से सींचा जाए, तो यह जीवन में अपार सफलता, […] - [Respect yourself and dont prof it to anyone](https://gyanvividha.com/respect-yourself-and-dont-prof-it-to-anyone/): चीते की प्रतियोगिता कुत्तों से हो रही थी…. लोग तुलना करना चाहते थे कि कौन तेज दौड सकता है? लेकिन सभी हैरान थे कि चीता प्रतियोगिता के लिए अपनी जगह से बाहर तक नहीं आया।। लोगों ने रेस संयोजक से पूछा कि आखिर चीते को हुआ क्या है? रेस संयोजक ने प्रतिक्रया दी, कृपया इस तस्वीर पर गौर करें। कभी-कभी यह साबित करने के लिए, कोशिश करना कि, आप सबसे अच्छे हैं….यह भी स्वयम के लिए “एक अपमान है”। आपको दूसरों के स्तर तक नीचे जाने की जरूरत नहीं है, किसी को समझाने की आवश्यकता नहीं कि आप बेहतर हैं, […] - [विधि का विधान](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8/): विधि का विधान भी कैसा है, सबको सबकुछ नहीं मिलता। किसी को मिलता है सागर तो, किसी को एक बूंद भी नहीं मिलता। कोई पढ़ लिख कुछ बन जाता है, तो किसी को गुरु नहीं मिलता। कोई भोजन को फेके बाहर, तो किसी को खाना नहीं मिलता। क्यों इतना है अंतर सबमे, इसमे किसी गलती है। छोड़ जाता है कोई जल्दी, किसी को काल नहीं पुछती है। खुद के कर्म को अच्छा रखना, किस्मत भी बादल जाएगी। गर मिला है दुखो का सागर, जल्द ही सुख भी आएगी। विधान का विधान तो देखो। कोई 10-10 बच्चो से खोले, किसी के […] - [सुकून के पल](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%82%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b2/): सुकून है वो तोफ़हा जो सबको सब जगह नहीं मिलता, इसे पाने के गर खोना पड़े कुछ तो खोना जरूरी है। एक कप चाय के साथ अपने विचारों में डूबना सुकून है, अपने लोगों के बीच में बैठ कर बोलना-सुनना सुकून है। अपने बच्चे को बढ़ते सही रह पर चलते देखना सुकून है, नहीं मिलता यह हर जगह, अपने घर में भी होना सुकून है। कभी-कभी लड़ भी लेती हूँ जब कोई नहीं सुनता मेरी बातों को, बिना कुछ कहे दूसरों को एहसास दिलाना भी सुकून है। मन उलझन में हो और कुछ समझ न आए, करना क्या है, उसी […] - [असफलता सफलता के लिए जरूरी है।](https://gyanvividha.com/%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%ab%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ab%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80/): दुनिया में शायद ही कोई ऐसा वैज्ञानिक आविष्कार हो, जो पहली बार में सफल हो गया हो। दुनिया में शायद ही कोई पर्वतारोही ऐसा हो, जिसके कदम फिसले न हो और पहले ही प्रयास में दुनिया के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच गया हो। कोई काम जब हम शुरू करते है, और अपना लक्ष्य तय करते है कि हमें वहाँ तक पहुँचना है तो संभावना है कि लक्ष्य तक जितना हमने सोचा था उससे ज्यादा समय लगे। कभी भी हमें हताश होकर अपना लक्ष्य नहीं छोड़ना चाहिए। क्योंकि व्यक्ति हमेशा अपने अनुभव से ही सिखता है। दुनिया में कितने ही किताबें […] - [मेरी लेखनी का सफर](https://gyanvividha.com/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ab%e0%a4%b0/): मुझे लिखने का शौख बहुत पहले से था। मैं अपनी डायरियों में अपने विचार कविताओं के रूप में लिखती थी। उन्हे कभी प्रकाशित करवाने का मौका नहीं मिला मुझे। मेरे पास अभी भी एक डायरी ऐसी है जिनके पन्नों पर मेरी कविताए है। जीवन हमें कभी खट्टे तो कभी मीठे अनुभव देता है। जब हमें जीवन से बुरे अनुभव मिले तो बहुत ज्यड़ा परेशान होने के बजाय खुद को शांत रखना चाहिए और यह सोचना चाहिए कि यह समय भी कट जाएगा। जैसे दिन हमेशा नहीं रहता, वैसे ही रात भी हमेशा नहीं रहती। रात के अंधेरे के बाद सूरज […] - [श्री कृष्ण की महिमा](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be/): श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान श्रीकृष्ण मेरे नटखट गोपाल, यमुना के तट पर रचाये रास। माता इनकी देवकी मैया, यशोदा के भी कहलाए लाल। बचपन में जाते गाय चराने, हर गोपियों के दिल में करते वास। शेष नाग के घमंड को तोड़ा, बनाया उनको अपना दास। कंस भी हारा मार न पाया उनको, अंत में हुआ उसका भी नाश। राधा-कृष्ण की लीला सबको है भाती, उन दोनों जैसा प्रेम नहीं दूसरा कोई खास। द्वारका में जाकर भव्य नगर बसाया, हुआ उसमे कृष्ण प्रेमियों का वास। रुक्मनी से कृष्ण ने ब्याह रचाया, दिया उनका कठिन परिस्थिति में साथ। अर्जुन को धर्म-संकट […] - [एक प्रार्थना](https://gyanvividha.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%a8%e0%a4%be/): माना- जीवन के ये रास्ते बहुत लंबे है, चारों ओर बाधाएँ है, अंधेरा है, रुकावट है, लेकिन ये लंबे रास्ते पल भर में कट जाएंगे, अंधेरे के बाद एक नयी सुबह लाएँगे, जो एक रोशनी लाएगी, ये बाधाएँ बर्फ सी पिघलकर बह जाएगी। हे भगवान! मन में हौसला बनाए रखना। माना- आज जिंदगी थोड़ी मुश्किल हो गई है, सच भी आज झूठ के आगे झुक गई है, ईमानदारी कहीं आज बेरोजगारी के आगे खो गई है, लेकिन जीवन आसान हो जाएगा, सच भी अपना रंग जरूर दिखलाएगा, ईमानदारी भी अपनी सही जगह पाएगा, हे भगवान! विश्वाश बनाए रखना। माना- भ्रष्टाचार […] - [रक्षाबंधन का महत्त्व](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5/): रक्षाबंधन का महत्त्व रक्षाबंधन का त्यौहार केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं है और ना ही भाई बहनों तक। रक्षाबंधन पर सभी बहने अपने भाई के हाथ पर राखी बांधती है, जिसे वह अपना रक्षा सूत्र समझती है कि मेरा भाई सदैव मेरी रक्षा करेगा, ऐसा भी देखा गया है कि किसी परिवार में कन्या ही कन्या होती है और पुत्र नहीं होता तो वहां पर बहिनें बहुत दुखी होती है कि कास हमारा भी कोई भाई होता, ऐसी स्थिति में उन बहनों को कभी भी किसी भी तरह दुखी नहीं होना चाहिए परस्पर दोनों बहनों को एक दूसरे पर […] - [ पति-पत्नी का रिश्ता](https://gyanvividha.com/%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be/): पति-पत्नी का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता है जिसमें प्यार, टकरार, नोक-झोक सब होता है। यह एक ऐसा अनोखा रिश्ता है जिसमे पति कभी गाइड बन जाता है और अपनी पत्नी को राह दिखाता है, कभी दोस्त बनकर उसका साथ देता है, तो कभी पति-पत्नी में टॉम और जेरी की तरह हमेशा लड़ाई ही होती रहती है। लेकिन यह रिश्ता चलता जीवन भर है चाहे प्यार से बीते या लड़ाई से। अधिकतर पत्नियाँ अपने पति को सुनाती रहती हैं, तो बहुत सी पत्नियाँ सुनती भी है चुप होकर। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है और पति-पत्नी साथ में बूढ़े होने लगते है, […] - [लेखिका डॉ. ऋषिका वर्मा की आत्मा कथा](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a1%e0%a5%89-%e0%a4%8b%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%86/): डॉ ऋषिका वर्मा वर्तमान में दर्शन विभाग, हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर (गढ़वाल) उत्तराखंड में सहायक आचार्य के पद पर कार्यरत हैं। ऋषिका वर्मा मूलतः वाराणसी की रहने वाली है। उनके माता का नाम श्रीमति सुशीला वर्मा एवं पिता का नाम श्री लक्षमण प्रसाद है। उन्होनें अपनी उच्च शिक्षा बी.ए., एम.ए., पीएच.डी. एवं यू.जी.सी. द्वारा अनुमोदित पोस्ट डॉकटोरल फ़ेलोशिप बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। उन्होने संस्कृत, बंगालिम तमिल, एवं रूसी जैसे कई भारतीय एवं विदेशी भाषाओं में बनरस हिन्दू विश्वविद्यालय से डिप्लोमा किया है एवं बी.एच.यू. के काला संकाय और महिला महाविद्यालय में पाँच वर्ष तक अपना […] - [बचपन की सुनहरी यादें](https://gyanvividha.com/%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%aa%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%82/): जब दिल था निर्मल और चहरे पर मुस्कान थी। न कोई चिंता और न कोई थकान थी। हर सुबह थी नहीं उमंगों से भरी, और हर शाम लाजवाब होती थी। मिट्टी से खेलना, पेड़ों पर चढ़ना, वो भी क्या दिन थे बेफिक्री से भरे। गर्मी की छुट्टियों में गुल्ली डंडे का खेल, लूडो और सांप सीधी का मेल। स्कूल का बस्ता था भरी पर मन हल्का था। वो बचपन भी कितना अच्छा था। रंगीन पतंगों को उड़ाने का अलग ही मजा था। तितलियों के पीछे भगाना भी अच्छा लगता था। मां दादी हर रोज कहानियां सुनती थी। वो बचपन अब […] - [पर्यावरण संरक्षण](https://gyanvividha.com/%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%a3/): धरती माँ की गोद है प्यारी, इसकी रक्षा सबकी जिम्मेदारी। वृक्षों को मत काटो यार, ये हैं जीवन के आधार। पेड़ लगाओ, जल बचाओ, स्वच्छ हवा में सांस को पाओ। वनों का न हो विनाश, पक्षियों का इनमे है वास। नदियाँ हमारी जीवनधारा, देती है हमको ये सहारा। आओ मिलकर हाथ बढ़ाएँ, धरती को हरा-भरा बनाएँ। पर्यावरण संरक्षण का लें प्रण, प्रकृति के हर रूप का करें वंदन। - [सावन का महिना](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be/): सावन का महिना सावन सबके लिए खुशहाली लेकर आता है। यह सावन बच्चे, बूढ़े सबको भाता है। चारों ओर फैली हरियाली की चादर, सबके मन को भाए सावन की रंगत। हरी-हरी चूड़िया और महंदी रचे सबके हाथों मे, हरियाली तीज भी सभी मानते है इसी सावन मे, सब इस महीने शिव की भक्ति में दुबे रहते, बेलपत्र, धतूरा शिव को चढ़ाके सब खुश हो जाते। शिव भी करते है सुबकी मनोकामना पूरी, रहती नहीं किसी की भी कोई इच्छा अधूरी। सावन का महिना मनमोहक मनभावन है। आता है हर साल दिल खुशी से भर जाता है। - [शिव की महिमा](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be/): शिव की महिमा बर्फीली चोटियों पर विराजमान, कैलाश है उनका निवास। तीन नेत्रों में ज्योत जलती, हर युग में जिनका है वास। शिव की जटाओं में बसती गंगा महान। नागराज वासुकि गले में होते है शोभित, त्रिशूल धारण किए, तांडव है शिव का नृत्य। समस्त लोगों में गूँजती है उनके डमरू की गूंज। विनाशक भी और सृष्टि करता भी है मेरे शिव। उनकी महिमा का सभी करते है गुणगान। समुद्र मंथन से निकले विश को पीकर, कंठ मे धारण, करके नीलकंठ कहलाए। ध्यान में रहते हर समय शिव। शिव ही भक्ति, शिव ही पूजा। शिव के सिवा न कोई दूजा। […] - [दोस्ती](https://gyanvividha.com/%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%80/): दोस्ती की राहें होती हैं अनमोल, उसका नहीं चुका सकता कोई मोल। तूफानों में भी जो साथ रहे, हर दुख में अपने पास रहे। हंसते-हंसते जो गम को बाँट दे, हमेशा जो मुसीबत मे साथ दें। छोटी-छोटी बातें जो समझे बिना कहे, जो दोस्त के बिना एक पल न रहे। रात के अंधेरे में जो रोशनी दिखाए, वही दोस्त सच्चे दिल से प्यारे कहलाए। दोस्ती की मीठी खुशबू कभी नहीं मिटती, चाहे साथ हो या न हो दोस्ती। ऐ दोस्त, तू हमेशा मेरे साथ रहे, तेरी मुस्कान ही मेरी हर खुशी का राज रहे। - [नारी तुम्हें अपने लिए खुद लड़ना होगा](https://gyanvividha.com/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%a6/): उठो नारी और लड़ो अपने लिए, कोई नहीं आएगा तुम्हें बचाने। खुद को सबल बनाओ इतना, कोई हाथ डाल न सके तुमपर कोई। समय आ गया, अबला नहीं सबला बनने का। तोड़ दो वो हाथ जो तुम्हें गंदी भावना से स्पर्श करे। अपने बच्चों को भी सबल बनाना होगा। उनको मार्शल आर्ट सीखना होगा। अपनी रक्षा स्वयं करेंगी, अभी लड़कियां किसी के भरोसे नहीं रहेंगी। अपने साथ ऐसा सामान रखो, लिस्पटिक्स और शीशे की जगह, पैपर स्प्रे और सेफ्टी पिन रखो। चला दो उस पर ये हथियार, जो डाले तुम्हारे ऊपर गंदी नजर का वार। उठो अब तुम्हे अपने लिए […] - [रक्षाबंधन](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%a8/): रक्षाबंधन: भाई-बहन का प्यार भाई-बहन का रिश्ता प्यारा, अनोखा, अलग और निराला। भाई-बहन आपस मे झगड़ते, कुछ देर बाद फिर मिल जाते। एक दूसरे से जलते भी है, और प्यार भी बेशुमार लुटाते। बड़ा भाई परवाह है करता, तो छोटा भाई करता परेशान। बड़ी बहन को सताते सब हरदम, करने देते नहीं कोई काम । बहनों की जब शादी हो जाती, रह जाते है बिलकुल अकेले भाई रक्षाबंधन जब आए हर साल, खुश हो जाते है सब भाई। मिलकर सब मस्ती है करते, बचपन की याद दिलाते है सब। कैसे सब आपसे में लड़ते, फिर आपस में मिल जाते है। […] - [योग की मानव जीवन में आवश्यकता](https://gyanvividha.com/%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%86%e0%a4%b5%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%af/): संसार में सामान्य रूप से प्रवृत्ति देखी जाती है कि प्रत्येक प्राणी सुख प्राप्त करना चाहता है एवं दुःखों से बचना चाहता है। मानव भी इसका अपवाद नहीं है, इसलिए मानवमात्र की प्रवृत्ति भी सुखोन्मुख ही देखी जाती है। ‘स्वामी सत्यपति परिव्राजक’ के शब्दों में- संसार में प्रत्येक मनुष्य की यह स्वाभाविक प्रवृत्ति देखी जाती है कि वह समस्त दुःखों, बन्धनों एवं पराधीनता से मुक्त होना चाहता है और नित्यानन्द, मोक्ष एवं स्वतन्त्रता को प्राप्त करना चाहता है।[i] इसी प्रकार ‘हिन्दी शब्दसागर’ में सुख का अर्थ करते हुए कहा गया है कि- मन की वह उत्तम तथा प्रिय अनुभूति जिसके द्वारा […] - [ग़ज़ल:-साँस लेता सदन अब रहा ही नहीं](https://gyanvividha.com/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%b8-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a4%a8-%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be/): साँस लेता सदन अब रहा ही नहींदृष्टि में बाँक पन अब रहा ही नहीं इस तरह फूल तोड़े गये डाल सेवो महकता चमन अब रहा ही नहीं ढूँढे मिलता नहीं प्यार सच्चा यहाँजिस्म दो एक मन अब रहा ही नहीं स्वार्थ कुछ इस तरह छा गया आजकलदोस्ती का चलन अब रहा ही नहीं विश्व बाजार की मण्डियाँ हैं यहाँये वतन वो वतन अब रहा ही नहीं कत्ल करने लगे हैं मसीहे यहाँउनका उन जैसा मन अब रहा ही नहीं सिंधु मंथन में विष की घुटन रोक लेशंकरी आचमन अब रहा ही नहीं जिसको माना था हमने कभी अपना वोजानेमन जानेमन […] - [मंचों का किरदार हूं](https://gyanvividha.com/%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%82/): कलम का पुजारी, मनमौजी फनकार हूं।साधक हूं शारदे का, वाणी की झंकार हूं। शब्दों की माला बुनता, कोई कलमकार हूं।गीतों की लड़ियों में, सुर छेड़ती सितार हूं। कविता के बोल मीठे, बहती सी रसधार हूं।आशाओं का दीपक हूं, ओज भरी हुंकार हूं। चेतना की अलख जगे, कलम का सिपाही हूं।मनमानस छाये कविता, लेखनी की स्याही हूं। दिलों तक दस्तक देती, वो भावों की गहराई हूं।महक उठता मन का कोना, मधुर सी पुरवाई हूं। शब्दों का गुलदस्ता हूं, प्यारे गीतो की बहार हूं।काव्य छलकता कलश सुधारस की फुहार हूं। मनमौजी मतवाला सा, कोई सृजनकार हूं।मन को छू जाए, वो ठंडी बहती […] - [ग़ज़ल:-तुम्हारी यादों की रोशनी में](https://gyanvividha.com/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0/): तुम्हारी यादों की रोशनी में सफ़र ज़िंदगी का तय करेंगेजहाँ कहोगी वहीं पे ख़ुद को तुम्हारे में हम बिलय करेंगे रहेंगे बन के तुम्हारा साया तुम्हारी ताकत तुम्हारी हिम्मतहरिक लड़ाई में हौसले से सदा तुम्हारी ही जय करेंगे कोई मुसीबत कोई भी उल्झन न आने देंगे तुम्हारी जानिबपड़े फ़ना होना चाहे हमको पै जान तुमको अभय करेंगे हजारों तकलीफें झेल लेंगे तुम्हारी खातिर ए जानेजानाकिसी भी सूरत ख़ुशी तुम्हारी कभी कसम से न क्षय करेंगे करेंगे सबकुछ निसार तुम पे जिगर भी दिल भी ये धड़कनें भीबिना ही सोचे सनम तुम्हारे ही नाम अपना ह्रदय करेंगे कभी कहीं भी मेरी […] - [ग़ज़ल:-दीवारो-दर से जिसकी सदा गूँजती रही](https://gyanvividha.com/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8/): दीवारो-दर से जिसकी सदा गूँजती रहीमेरी निगाह घर में उसे ढूँढती रही अहसास था ख़याल तसव्वुर यक़ीन थाकिस किस लिबास में वो मुझे पूजती रही मैं काम की तलाश में परदेस में रहावो ग़मज़दा ग़मों से यहीं जूझती रही मैं लिख सका न उसको तबस्सुम की चिट्ठियाँलिख लिख के क़हक़हे वो मुझे भेजती रही बच्चों की ज़िद में उसने कभी की कमी नहींख़्वाहिश वो अपने दिल की सदा टालती रही दीवार जब उठाई तो सबको सुकून थापुरखों की आन-बान मगर टूटती रही साग़र रह-ए- हयात में आयेंगी मुश्किलेंतेरी ग़ज़ल ये सच ही अगर बोलती रही - [ग़ज़ल:-दुल्हन न बन सकी कभी ख़ुद की निगाह में](https://gyanvividha.com/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%96/): दुल्हन न बन सकी कभी ख़ुद की निगाह मेंजो भी मिला वो ले गया ख़्वाबों की राह में छोड़ा है मुझको लाके कहाँ मेरे मेहरबाँक्या कुछ कसर न छोड़ी थी मैंने निबाह में जो दिन की रौशनी में नहीं देखते मुझेक़दमों को चूमते हैं वही ख़्वाबगाह में मिटने में मेरे क्या रही अब भी कोई कसरक्या रहम कुछ नहीं है किसी की निगाह में ऐ मालिक-ए-नसीब दी कैसी मुझे सज़ाऐसी भी क्या ख़ता थी बता मेरी चाह में यह बात पूछना तो कभी मुझसे पूछनाकितने छुपे हैं दाग़ यहाँ किस कुलाह में अहसान मुझपे आज मेरी हर ग़ज़ल का हैहर […] - [ग़ज़ल:-हर खुशी ही रेत सी](https://gyanvividha.com/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a5%80/): हर खुशी ही रेत सी हरदम फिसल जाती है क्यूँहर घड़ी अब जिंदगी की ग़म में ढल जाती है क्यूँ थाम कर के हाथ जिसका चाह थी आगे बढ़े़बस वही शय दौड़ कर आगे निकल जाती है क्यूँ वो जिसे था जान माना दिल दिया दिलबर कहादेख दौलत दिलरुबा वो दिल को छल जाती है क्यूँ शम्अ परवाना जले यह उनके अपने कौल थेतू बता इस बात पर यह दुनिया जल जाती है क्यूँ जाग कर जिसके लिये हमने कई शब काट दींवह घड़ी हमसे बचा दामन निकल जाती है क्यूँ कौन सा है यह चलन दिल का समझ आया […] - [ग़ज़ल:-अभी तो शाम बाकी है](https://gyanvividha.com/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): अभी तो शाम बाकी है जरा सूरज ये ढलने दोचले जाना कहाँ रोका है चंदा तो निकलने दो नहीं रोको नहीं मुझको मैं तो मस्ती मे आया हूँमचलते हैं मिरे अरमान उनको भी मचलने दो तुम्हारी आज फिर मुझको ए साकी याद आती हैगिरा चौखट पे हूँ जानम न मुझको अब सम्हलने दो अभी आये हो मेरे पास और जाने की कहते होभरो इक जाम तुम और आज की ये शाम ढलने दो मुझे मदहोश कर डालो सनम आगोश में ले करगिरा दो जुल्फों का साया मेरी दुनिया बदलने दो नहीं ग़म आज है कोई भले ही दम निकल जायेपिघलती […] - [गीत:-साथ निभाए वही मीत है](https://gyanvividha.com/%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%8f-%e0%a4%b5%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): साथ निभाए वही मीत है जीवन की यही रीत है, साथ निभाए वही मीत है।नैनों से नेह बरसे, दिल से दिल की यही प्रीत है।साथ निभाए वही मीत है जीवन पथ पर संग चले, सुख-दुख में साथी हो।हर आंधी तूफानों में, प्रेम पाले दीपक बाती सो।डगर डगर पे गुनगुनाते जाए, प्यार भरा गीत है।जिंदगी की डगर सुहानी, धड़कने सुर संगीत है।साथ निभाए वही मीत है नैनों की भाषा जाने, दिल की धड़कनें पहचाने।अधरो पर आने से पहले, शब्दों का संसार जाने।संघर्षों में संबल हो, मिल जाती हर बार जीत है।राहों में बढ़ते रहना, पथिक पथ की यही रीत है।साथ निभाए […] - [ग़ज़ल:-साज़े-दिल पर ग़ज़ल गुनगुना दीजिए](https://gyanvividha.com/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%97/): साज़े-दिल पर ग़ज़ल गुनगुना दीजिएशामे-ग़म का धुँधलका हटा दीजिए ग़म के सागर में डूबे न दिल का जहाँनाख़ुदा कश्ती साहिल पे ला दीजिए एक मुद्दत से भटके लिए प्यास हमसाक़िया आज जी भर पिला दीजिए इल्तिजा कर रहा है ये रह-रह के दिलफ़ासला आज हर इक मिटा दीजिए कर रही हैं बहारें भी सरगोशियाँमन का पंछी हवा में उड़ा दीजिए मुन्हसिर आपकी हम तो मर्ज़ी पे हैंआपके दिल में क्या है बता दीजिए दोनों घुट-घुट के इक दिन न मर जायें यूँबात बिगड़ी हुई अब बना दीजिए अपनी मंज़िल की जानिब रहूँ गामज़नमेरे जज़्बात को हौसला दीजिए इन अंधेरों में […] - [ग़ज़ल:-बहकना है यार बाकी](https://gyanvividha.com/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%80/): अभी वो निकली है मयकदे से अभी बहकना है यार बाकीअभी कदम पड़ रहे सही है अभी फिसलना है यार बाकी अभी बहारों के साये उसपे पड़े है केवल ज़रा ज़रा सेअभी बनी है कली से गुल वो अभी महकना है यार बाकी अभी अभी लड़खड़ाना उसका ज़रा ज़रा सा शुरू हुआ हैअभी नशे के है लुत्फ़ में वो अभी सँभलना है यार बाकी अभी तो उसने नई डगर पे है आ के अँगड़ाई एक ली हैअभी अभी तो खुलीं हैं पलकें अभी चहकना है यार बाकी चला के अपनी नज़र का ज़ादू किया है मदहोश उसने सबकोअभी है दीवानगी […] - [एक दिन आयेगा](https://gyanvividha.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be/): एक दिन आयेगाऔर हम सब चले जाएंगे। कहां जायेंगेपता नही । पर उस टाइम कोईरोने वाला नही होगा। पर कोने में पड़ी होंगीकुछ कविताएं। जो लिखी गई थीशायद इसी दिन के लिए । ताकि जब कुछ न बचेतब बच जाएं कविताओं के अवशेष। और जब कोई बोल न पाएऔर नाही सुन पाए कुछ । तब उस समय में भीपढ़ी जा सके कविताएं। और पढ़ कर के उनकोनिहारा जा सके एक दूसरे को । क्योंकि सब कुछ तो चला जायेगाकविताओं में लिखा प्रेम अमर है। - [मजदूर दिवस](https://gyanvividha.com/%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8/): मैएकइंसानआप जैसामेरे दिल मेंभी तो पलता हैअरमान आप सामहनती भी हू मैवफा दार भी हूँकाम के प्रतिमजदूरही हूँ मैसच्चाजी मैंएकजीवटश्रमजीवीअपने बूतेपोषित करताअपना परिवारतकलीफ से सहीपर रहता हैअात्म संतोषश्रमिक हूँभिखारीनहींमैं मेरा हक मुझेयूँ फेक करमत दीजिएसाहिबयह मेरे पसीनेकी कीमत हैकोई आपकीदयानतदारी नहीमैने किया हैसहयोगआपकाऔर उसकेबदले मेंले रहा हूँआपसेउसकाउचित मूल्यऔर दिल सेआकांक्षी भी हूँअपनीकमाई कोबाइज्जतपाने कायह मेरीमजदूरी हैदीजिए इसेअपने हाथ सेमेरे हाथों मेक्योंकि मैंमेहनतकशमजदूर हूँसाहिबभिखारी नहीं - [श्रमिक दिवस को समर्पित:-गीत](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%97%e0%a5%80/): तुम वर्तमान के पृष्ठों पर ,पढ़ लो जीवन का समाचार ।क्या पता कौन से द्वारे से ,आ जाये घर में अंधकार।। आशा की किरणें लौट गयीं ,बैठी हैं रूठी इच्छायेंप्रात: से आकर पसर गईं ,आँगन में कितनी संध्यायेंइन हानि लाभ की ऋतुओं में, तुम रहो सदा ही होशियार ।।तुम वर्तमान—– चल पड़ो श्रमिक की भाँति यहाँ, छेड़ो जीवन का महासमअवसान हताशा का कर दो ,सुरभित हों मरुथल गाँव नगरश्रमदेवी कर में भेंट लिये ,आयेगी करने चमत्कार ।।तुम वर्तमान——– प्राची ने शंख बजाया तो ,कर्तव्यों का दिनमान चलाफिर कलश उठाये हाथों में ,जीवन क्रम का अभियान चलाहर गली मोड़ चौराहों पर […] - [ग़ज़ल:-ज़ब दिल दिल से मिलता है](https://gyanvividha.com/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%ac-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%be/): बहुत होता सुकूँ तब है कि ज़ब दिल दिल से मिलता हैअदब का हर नज़ारा तब तिरी महफ़िल से मिलता है तिरे पे मर मिटा हूँ मै सनम दिल ज़ान ईमां सेतिरा चेहरा ए ज़ान ए मन मिरे कातिल से मिलता है ज़िगर में भाव उठते हैं तुझे पा कर सनम ऐसेकि जैसे जब सफीना ज़ानेमन साहिल से मिलता है मिरे आगोश में तू आता है तब सोचता हूँ मैंमुहब्बत का हँसी पल ये बड़ी मुश्किल से मिलता है मगर जब बेवज़ह ही तू फिरा लेता है रुख़ अपनाचलन ये तेरा तब ज़ाने ज़िगर संगदिल से मिलता है ये माने […] - [ग़ज़ल:-अगरचे हौसला . मिट जायेगा](https://gyanvividha.com/%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%8c%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%9f-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%af/): कर्म करने का अगरचे हौसला . मिट जायेगाकामयाबी का तो समझो फ़लसफ़ा मिट जायेगा सोच से जब प्यार औ दिल से ख़ुदा मिट जायेगाइंसानियत हैवानित का फ़ासला मिट जायेगा जिस घड़ी जेहन से अहसासे वफ़ा मिट जायेगाये जहां रब की कसम बेसाख़्ता मिट जायेगा क्या बचेगा जिंदगी में सोच कर तो देखियेजो दिलों से अपनेपन का सिससिला मिट जायेगा जब ज़फ़ा करने लगेगा तू मुहब्बत में सनमबस उसी दिन तेरा मेरा राब्ता मिट जायेगा बज़्म में तेरी रकीबों की हुई आमद तो फिरये तेरा दीवाना भी हो के फ़ना मिट जायेगा मेरी इस उल्फ़त के बदले जानेमन बतला मुझेराज का […] ## Pages - [Our Journal's](https://gyanvividha.com/our-journals/): ज्ञानविविधा के तत्वावधान में उच्च शिक्षा और शोध, रचनाशीलता और नव्य रचनाकारों तथा साहित्यिकों, विद्वतजनों, शिक्षकों के ज्ञान और नवाचार को समर्पित. हमारी पत्रिकाएँ:- 1. ISSN-3048-4537 (Online) &3049-2327 (Print) कला, मानविकी और सामाजिक विज्ञान की सहकर्मी-समीक्षित, मूल्यांकित, त्रैमासिक शोध पत्रिका A Peer-Reviewed & Refereed, Indexed Online Journal IIFS Impact Factor-2.25 2. ISSN-3048-9296 (Online) & 3049-2890 (Print) कला, मानविकी और सामाजिक विज्ञान की सहकर्मी समीक्षित अर्धवार्षिक मूल्यांकित शोध पत्रिका A Peer Reviewed & Refereed, Indexed online Research Journal IIFS Impact Factor-2.0 - [शोध-प्रवाह](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b6%e0%a5%8b%e0%a4%a7-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b9/) - [अपनी रचना भेजें](https://gyanvividha.com/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%87%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%82/): अपनी रचना भेजें *तारांकित को भरना अनिवार्य है. - [रचनाकारों की सूची](https://gyanvividha.com/authors/) - [प्रादेशिक प्रतिनिधि](https://gyanvividha.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%bf/): प्रादेशिक प्रतिनिधि - [सम्मानित साहित्यकारों की सूची](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80/): सम्मानित साहित्यकारों की सूची श्री शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय राम सहारे मिश्र आनन्द गिरि मायालु पवन गोस्वामी राज शुक्ल गजलराज डॉ मंजु सैनी 1 2 - [योगदानकर्ताओं की सूची](https://gyanvividha.com/%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%9a%e0%a5%80/): योगदानकर्ताओं की सूची ज्ञानविविधा का यह विशेष अनुभाग हमारे उन सहयोगियों को समर्पित है जिन्होंने ज्ञानविविधा के विकास में योगदान दिया है या भविष्य में देंगे। हम उनके आभारी भी हैं और कृतग्य भी। अगर आप भी हमारे साथ जुड़कर ज्ञान के  प्रचार-प्रसार और संग्रह में योगदान करना चाहते हैं तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। आप हमारे ईमेल-vividhagyan@gmail.com या whatsapp-9472393039 पर हमसे संपर्क कर सकते हैं। - [Scholarship Quiz](https://gyanvividha.com/scholarship-quiz/): Apply For Scholarship [ultimatemember form_id=”11652″] - [Online Test For Scholarship](https://gyanvividha.com/online-test-for-scholarship/): Apply For Scholarship - [सूचना](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be/): सूचना & आयोजन - [Free Online Mock test](https://gyanvividha.com/free-online-mock-test/): Free Online Mock test - [ज्ञानविविधा में अपना अकाउंट रजिस्टर करने के लिए आपका आभार](https://gyanvividha.com/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%be/): ज्ञानविविधा में अपना अकाउंट रजिस्टर करने के लिए आपकाआभार!आपके खाते की मैन्युअल रूप से समीक्षा की जानी है।.कृपया हमें आपके अनुरोध को संधारित करने और आपकी जानकारी की समीक्षा करने के लिए कुछ समय दें। कृपया हमें आपके अनुरोध को संधारितत करने और आपकी जानकारी की समीक्षा करने के लिए कुछ समय दें। यदि आपको कोई समस्या है, तो कृपया हमसे यहां संपर्क करें Email : vividhagyan@gmail.com WhatsApp - [रचना भेजने का तरीका](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b0%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%87%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a4%be/): रचना भेजने का तरीका रचनाकार के रूप में आपका पूरा नाम लिखें| नाम की वर्तनी शुद्ध लिखें| उपनाम(यदि प्रयोग करते हैं तो) अपनाएक चित्र  जन्मतिथि(वर्ष सहित) जन्मस्थान(राज्य के नाम सहित) यदि कोईपुस्तक प्रकाशित हुई है तो पुस्तकों और उनके प्रकाशकों के नाम(यदि आप देना चाहें) प्राप्त पुरस्कार जीवनी  कम से कमपांच रचनाएँ  इस ईमेल में आपको साफ़ शब्दों में लिखना होगा की आपको, आपके किसी भी प्रकाशक को या आपकी रचनाओं के अन्य कॉपीराइट धारक को ज्ञानविविधा में आपकी रचनाओं के संकलन पर किसी भी प्रकार की कोई भीआपत्ति नहीं हैऔर इन सभी की ओर से आपकी रचनाओं को कोश में […] - [ज्ञानविविधा में योगदान](https://gyanvividha.com/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a8/): ज्ञानविविधा में योगदान  वे कोई भी व्यक्ति जो अपने किसी भी व्यक्तिगत हितों पर ध्यान दिए बिना ज्ञान का प्रसार करने के  इच्छुक हैं, इस परियोजना को अपना योगदान दे सकते हैं। वे कोई भी जो ज्ञानविविधा  के जरिये अपने कृतित्व को सुरक्षित व संरक्षित रखना चाहते हैं एवं उसे जन-जन तक पहूँचाकर सबको लाभान्वित करने के इच्छुक हैं, इस परियोजना को अपना योगदान दे सकते हैं। इस प्रकार कोई भी व्यक्ति, किसी भी व्यवसाय से जुड़ा व्यक्ति चाहे  वह स्वयं विद्यार्थी हो या किसान,  हर कोई ज्ञानविविधा के माध्यम से  ज्ञान के  प्रसार में अपना योगदान दे सकते हैं। […] - [गद्य–रचनाएँ](https://gyanvividha.com/%e0%a4%97%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b0%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81/): गद्य–रचनाएँ कहानी सूची देखे आलेख सूची देखे शोध-पत्र/आलेख सूची देखे उपन्यास सूची देखे लघुकथा सूची देखे व्यंग्य सूची देखे संस्मरण सूची देखे रेखाचित्र सूची देखे प्रेरक कहानियाँ सूची देखे बाल कहानियां सूची देखे शोध-प्रबंध सूची देखे पुस्तक-समीक्षा सूची देखे आत्मकथा सूची देखे डायरी सूची देखे पत्र-साहित्य सूची देखे साक्षात्कार सूची देखे जीवनी सूची देखे आलोचना सूची देखे एकांकी सूची देखे रिपोर्ताज सूची देखे प्रहसन (कामेडी) सूची देखे यात्रावृतांत सूची देखे विज्ञान कथा सूची देखे अनुदित सूची देखे साहसिक यात्रा(ऐडवेंचर) सूची देखे शिकार-साहित्य सूची देखे नाटक सूची देखे इतिहास अपनी रचनाएँ भेजें हिंदी साहित्य का इतिहास सूची देखे भारतीय साहित्य का […] - [पद्य-रचनाएँ](https://gyanvividha.com/%e0%a4%aa%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b0%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81/): पद्य-रचनाएँ कविता सूची देखे गज़ल सूची देखे गीत सूची देखे हाइकु सूची देखे ताँका सूची देखे सेदोका सूची देखे शेरो-शायरी व नज्म़ सूची देखे दोहा सूची देखे नवगीत सूची देखे मुक्तक सूची देखे भजन सूची देखे बाल कविता सूची देखे चौपाई सूची देखे - [ई-पत्रिकाएँ](https://gyanvividha.com/%e0%a4%88-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81/) - [ई-पुस्तकें](https://gyanvividha.com/%e0%a4%88-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%82/) - [अपनी रचनाएँ भेजें](https://gyanvividha.com/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81-%e0%a4%ad%e0%a5%87%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%82/): अपनी रचनाएँ भेजे - [रचनाएँ खोजें](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b0%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81-%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%82/): रचनाओं की सूची हमारे बारे में रचनाएँ खोजें अपनी रचनाएँ भेजें ई-पुस्तकें ई-पत्रिकाएँ योगदानकर्ताओं की सूची रचनाकारों की सूची विषय श्रेणियाँ हिंदी बाल-साहित्य उर्दू अंग्रेजी विज्ञान इतिहास अन्य पद्य-रचनाएँ कविता बाल-कविता गीत नवगीत गज़ल शेरो-शायरी भजन अनुदित मुक्त छंद/अन्य गद्य–रचनाएँ आलेख कहानी लघुकथा प्रेरक कहानियां बाल कहानियां व्यंग्य शोध-पत्र/आलेख शोध-प्रबंध पुस्तक-समीक्षा साक्षात्कार जीवनी आलोचना आत्मकथा डायरी पत्र-साहित्य संस्मरण नाटक एकांकी उपन्यास रेखाचित्र यात्राव्रत्त रिपोर्ताज प्रहसन (कामेडी) विज्ञान कथा साहसिक यात्रा(ऐडवेंचर) विदेशों में हिन्दी अनुदित इतिहास 1. हिंदी साहित्य का इतिहास 2. भारतीय साहित्य का इतिहास 3. संस्कृत साहित्य का इतिहास 4. भारत का इतिहास विविध कक्षा विषयक शिक्षण सामग्री कक्षा:- […] - [हमारे बारे में](https://gyanvividha.com/%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82/): हमारे बारे में भारत की संस्कृति,साहित्य,लोक परंपरा और विविध विषयक अक्षय ज्ञान के संकलन व प्रसार के लिए इन्टरनेट पर एकीकृत मंच ज्ञान विविधा ज्ञान के मुक्त कोष के रूप में डॉ. दिवाकर चौधरी द्वारा विविध विषयक ज्ञान को एकत्रित कर एक स्थान पर उपलब्ध कराने  हेतु अव्यावसायिक और सामूहिक परियोजना के रूप में परिकल्पित, स्थापित और संचालित है.इसका उद्देश्य भारतीय साहित्य, संस्कृति,लोक-परंपरा और ज्ञान के अक्षय भंडार को इन्टरनेट पर एकत्रित करने, संग्रहित करने और एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने का है. साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर और मेधावी छात्रों को यथासंभव सहयोग पहुँचाना भी है. आप […] - [Signup](https://gyanvividha.com/signup/): ज्ञानविविधा से जुड़े ज्ञानविविधा इण्टरनेट आधारित ज्ञान के विविध क्षेत्रों के एकीकृत कोष  के रूप में परिकल्पित परियोजना है जो दुनिया भर के उन सभी योगदानकर्ताओं द्वारा समुन्नत किया जा सकता  है, जो ज्ञान को बाँटने एवं उसका प्रसार करने में विश्वास रखते हैं। ज्ञानविविधा भारतीय साहित्य, संस्कृति,लोक परम्परा  और विविध विषयों से सम्बंधित  ज्ञान के अकूत भंडार को एकत्रित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया गैर व्यवसायी, शैक्षिक, सामाजिक और स्वयंसेवा आधारित सामूहिक  परियोजना है| इसका लक्ष्य सामाजिक हित है ना कि आर्थिक| SignUp करे ज्ञानविविधा पर किस विषय  से सम्बंधित रचनाएँ लिखी और संग्रहित की जाती है […] - 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[Contact](https://gyanvividha.com/contact/): हम आपकी सहायता कैसे कर सकते हैं ज्ञानविविधा से सम्बंधित अगर आपके पास कोई सुझाव है तो हमें अवश्य लिखें| हम आपके सुझावों की प्रतीक्षा करेंगे| आपका सुझाव हमारे लिए किसी सहयोग से कम नहीं हैं, ये हमारे प्रति आपके प्यार को दर्शाता है |  आपका सुझाव हमारे लिए अतिमहत्वपूर्ण है, हम उस पर गंभीरता से विचार करेंगे और उपयुक्त होने पर उस पर अमल भी करेंगे. हमें सुझाव देने के लिए धन्यवाद| अस्तु,इति शुभम| दिए गए फॉर्म के ज़रिये हमें अपनी बात लिखें। हम आपकी टिप्पणी और सवालों के उत्तर जल्द-अज़-जल्द देने की कोशिश करेंगे। आप हमसे ईमेल या […] - [Blog](https://gyanvividha.com/blog/) [comment]: # (Generated by Hostinger Tools Plugin)